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दिल्ली में मानसून से पहले ही ‘खेल’ खत्म? करोड़ों की सफाई के बाद भी डूबने वाली है राजधानी, सामने आया ये चौंकाने वाला सच!

दिल्ली में मानसून के दस्तक देते ही नालों की सफाई और सिल्ट (गाद) को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सरकार पर जनता के पैसों की बर्बादी और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया है।

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दिल्ली में मानसून के प्रवेश करते ही जलभराव और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर राजनीति चरम पर पहुंच गई है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सरकार और नगर निगम (MCD) की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने मानसून से पहले नालों की सफाई का बड़े स्तर पर प्रचार तो किया, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। नालों से निकाली गई गाद (सिल्ट) को सड़कों और नालों के किनारे ही छोड़ दिया गया, जिससे सफाई का पूरा उद्देश्य ही खत्म हो गया। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि कागजी दावों और जमीनी हकीकत में कितना बड़ा अंतर है।

करोड़ों का बजट और ‘शून्य’ नतीजा: जनता के पैसे पर फिर फिरा पानी

कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव का कहना है कि हर साल दिल्ली के नालों की गाद निकालने के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास किया जाता है। जनता की गाढ़ी कमाई के इस पैसे का उपयोग ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए होना चाहिए था, लेकिन कुप्रबंधन के कारण यह पूरी तरह बर्बाद हो रहा है। नालों के किनारे हफ्तों तक पड़ी रही सिल्ट पहली ही भारी बारिश में बहकर दोबारा नालों के भीतर समा गई है। यादव ने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने और दिखावे की राजनीति करने से दिल्ली की बुनियादी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। यदि निकाली गई सिल्ट का वैज्ञानिक तरीके से समयबद्ध निस्तारण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है।

जलभराव और ट्रैफिक जाम की दोहरी मार: दिल्लीवालों की बढ़ेगी मुसीबत

इस प्रशासनिक लापरवाही का सीधा खामियाजा दिल्ली की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। बारिश होते ही राजधानी की प्रमुख सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं, जिससे घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस सिल्ट को तुरंत युद्धस्तर पर नहीं हटाया गया, तो पूरी दिल्ली में जल निकासी व्यवस्था ठप हो जाएगी। जलभराव के कारण न केवल राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी होती है, बल्कि सड़कों पर फैली गंदगी से महामारी और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। एक तरफ जलभराव और दूसरी तरफ कीचड़ की वजह से दिल्ली का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त होने की कगार पर है।

जवाबदेही तय करने की उठी मांग: लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरना तय?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम में जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है। देवेंद्र यादव ने साफ कहा है कि जिन अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण यह सिल्ट दोबारा नालों में पहुंची है, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस की मांग है कि दिल्ली के सभी छोटे-बड़े नालों से तत्काल प्रभाव से सिल्ट को हटाकर उसके उचित और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था की जाए। पार्टी ने सरकार को नसीहत दी है कि वे पब्लिसिटी स्टंट छोड़कर दिल्ली को डूबने से बचाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं, ताकि मानसून के इस मौसम में दिल्लीवासियों को नरकीय स्थिति से बचाया जा सके।

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