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कौशांबी में ‘मुर्दा’ लौटा जिंदा: 13वीं की पूरियां खाकर गए थे रिश्तेदार, अगले ही दिन ऑटो से उतरा वही शख्स तो फटी रह गईं सबकी आँखें!

कौशांबी के वैशाली में एक ऐसी सनसनीखेज घटना घटी जिसने सबको हैरान कर दिया। तेरहवीं के ठीक अगले दिन मृत घोषित शख्स जिंदा घर लौट आया।

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उत्तर प्रदेश के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली इलाके से एक ऐसी अविश्वसनीय और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। जिस घर में अभी एक दिन पहले तक मातम छाया हुआ था, रोने-बिलखने की आवाजें आ रही थीं और जहां रिश्तेदार शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे थे, वहां अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने सबके होश उड़ा दिए। बुधवार को जिस शख्स की आत्मा की शांति के लिए बकायदा ‘तेरहवीं’ का भोज आयोजित किया गया था, वही शख्स गुरुवार (25 जून) की सुबह अचानक एक ऑटो रिक्शा से अपने घर के बाहर आकर उतर गया। उसे सही-सलामत और जिंदा खड़ा देखकर आसपास के लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। कुछ लोग तो डर के मारे पीछे हट गए कि कहीं उन्होंने कोई भूत तो नहीं देख लिया, लेकिन जब उस शख्स ने खुद चिल्लाकर कहा, “मैं मरा नहीं हूँ, मैं जिंदा हूँ!” तब जाकर परिजनों को यकीन हुआ।

झगड़े से लेकर जेल और फिर गायब होने का रहस्य

इस पूरी रहस्यमयी दास्तान की शुरुआत पिछले महीने 16 मई को हुई थी। वैशाली के कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट का स्थानीय दुकानदारों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शांति भंग की धारा 151 के तहत गिरधर को डासना जेल भेज दिया। इसके बाद 21 मई को गिरधर की डासना जेल से रिहाई तो हो गई, लेकिन वह अपने घर वापस नहीं पहुंचा। परिजन उसकी तलाश में दिन-रात एक कर रहे थे, तभी 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में पुलिस को एक लावारिस शव बरामद हुआ। हुलिए और कपड़ों के आधार पर बदहवास परिजनों ने उस लावारिस शव की शिनाख्त गिरधर के रूप में कर दी। इसके बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया और रीति-रिवाज के साथ उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया।

थाने में हंगामा, हत्या का मुकदमा और गहराता सस्पेंस

लावारिस लाश को गिरधर मानकर जब उसका अंतिम संस्कार हुआ, तो परिजनों का गुस्सा पुलिस पर फूट पड़ा। कौशांबी थाने में परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा काटा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि गिरधर की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि उसकी हत्या की गई है। इसके बाद मसूरी थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ गिरधर की हत्या का बाकायदा मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया। लेकिन अब जब खुद गिरधर सिंह बिष्ट सकुशल और जिंदा अपने घर वापस लौट आया है, तो पुलिस प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं। सबसे बड़ा सस्पेंस अब यह बन गया है कि आखिर इतने दिनों तक गिरधर कहां गायब था और उसने अपने घर से दूरी क्यों बना रखी थी?

पुलिस के सामने खड़े हुए कई अनुत्तरित सवाल

गिरधर के जिंदा लौटने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, कौशांबी थाने की पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। अब इस मामले ने एक बेहद पेचीदा कानूनी और आपराधिक मोड़ ले लिया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि अगर गिरधर जिंदा है, तो वह शव किसका था जिसे परिजनों ने अपना समझकर दफनाया या जलाया था? परिजनों ने शिनाख्त में इतनी बड़ी चूक कैसे कर दी? और सबसे महत्वपूर्ण बात कि जिस अज्ञात शख्स की हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है, उसकी असली पहचान क्या है? फिलहाल पुलिस गिरधर को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है ताकि इन सभी सवालों के जवाब ढूंढे जा सकें। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही इस पूरे राज से पर्दा उठा दिया जाएगा।

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