बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सूबे की सियासत गरमाई हुई है, लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नजारा मंगलवार (23 जून, 2026) को पटना में देखने को मिला। दरअसल, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बीजेपी के प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। वहां मौजूद मीडियाकर्मियों ने जैसे ही भरत तिवारी एनकाउंटर और पुलिस पर लग रहे जातिवाद के आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री से तीखे सवाल दागे, तो हर कोई सन्न रह गया। इतने बड़े और संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरी तरह चुप्पी साध ली। उन्होंने पत्रकारों के किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और बिना एक शब्द बोले वहां से आगे बढ़ गए। मुख्यमंत्री की इस रहस्यमयी खामोशी ने अब सियासी गलियारों में कयासों के बाजार को और ज्यादा गर्म कर दिया है।
अपनों के ही निशाने पर सरकार! बीजेपी नेताओं ने पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे एनकाउंटर केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विपक्षी दलों से ज्यादा खुद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता इस पुलिसिया कार्रवाई पर आगबबूला हैं। बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने एनकाउंटर करने वाले पुलिस पदाधिकारियों की कार्यशैली को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। पार्टी के भीतर से ही यह आवाज उठने लगी है कि इस कार्रवाई में नियमों को ताक पर रखा गया। इतना ही नहीं, मामले में खुलकर ‘जातिवाद’ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। जब सत्ता पक्ष के नेता ही अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हों, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। यही वजह थी कि मीडिया लगातार मुख्यमंत्री से इस पर जवाब मांग रही थी कि आखिर उनकी ही पार्टी के नेताओं के इन गंभीर आरोपों पर सरकार का क्या रुख है, मगर मुख्यमंत्री की चुप्पी ने सस्पेंस को और गहरा कर दिया है।
पुलिस मुख्यालय एक्शन में: शाहाबाद रेंज के DIG को सौंपी गई हाई-लेवल जांच
भले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले पर अभी तक अपनी जुबान नहीं खोली है, लेकिन पुलिस महकमा इस पूरे विवाद को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहा है। बीते सोमवार (22 जून, 2026) को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कानून-व्यवस्था के महानिदेशक (एडीजी) सुधांशु कुमार ने साफ किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी बहुत ही बारीकी से जांच कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि एनकाउंटर से जुड़े हर एक पहलू की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जिम्मेदारी शाहाबाद रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंप दी गई है। पुलिस मुख्यालय खुद इस पूरी जांच प्रक्रिया की पल-पल की प्रोग्रेस रिपोर्ट पर नजर रख रहा है, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कोताही न बरती जा सके और दूध का दूध व पानी का पानी हो सके।
हाईटेक साक्ष्यों और फोरेंसिक विज्ञान के सहारे सच का पता लगाएगी पुलिस
भरत तिवारी एनकाउंटर केस की सच्चाई को सामने लाने के लिए बिहार पुलिस अब पूरी तरह से आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का सहारा ले रही है। एडीजी सुधांशु कुमार के मुताबिक, इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को लगाया गया है। इसके अलावा, तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। घटना स्थल से जुड़े भौतिक सबूतों को बेहद वैज्ञानिक ढंग से इकट्ठा और सत्यापित किया जा रहा है। मामले से जुड़े जो भी वीडियो फुटेज या अन्य विजुअल सामग्रियां सामने आई हैं, उनकी भी गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस का दावा है कि इस वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के जरिए बहुत जल्द एनकाउंटर की पूरी हकीकत सबके सामने आ जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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