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भरत तिवारी एनकाउंटर में आखिर क्या हुई चूक? बिहार पुलिस ने मानी गलती, जांच की कमान अब डीआईजी के हाथ

भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस ने पहली बार कार्रवाई के दौरान हुई चूक स्वीकार की है। SHO समेत पांच पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं, जबकि मामले की जांच अब न्यायिक आयोग और शाहाबाद डीआईजी की निगरानी में होगी।

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भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार स्वीकार किया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर लापरवाही हुई थी। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एडीजी (कानून-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने कहा कि 16 जून को पुलिस टीम जब आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पहुंची थी, तब हालात को सही तरीके से संभाला नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में कई स्तरों पर प्रक्रियात्मक कमियां सामने आई हैं। इसी लापरवाही को देखते हुए संबंधित थानाध्यक्ष, दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ सभी तथ्यों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

डीआईजी करेंगे निगरानी, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर जोर

पुलिस मुख्यालय ने पूरे मामले की निगरानी की जिम्मेदारी शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच को पारदर्शी बनाने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब  की मदद ली जा रही है। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी सामने आ सके। पुलिस का कहना है कि तकनीकी रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर अतिरिक्त कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।

सरकार ने बनाई न्यायिक जांच समिति

मामले को लेकर बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच राज्य सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेगा। आयोग घटनाक्रम से जुड़े सभी पक्षों के बयान दर्ज करेगा और जांच पूरी होने के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

एनकाउंटर पर एडीजी का बड़ा बयान

प्रेस वार्ता के दौरान एडीजी ने स्पष्ट कहा कि किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की उपलब्धि नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि केवल ऐसी स्थिति में बल प्रयोग किया जा सकता है, जब पुलिसकर्मियों की जान पर तत्काल खतरा हो और आत्मरक्षा के अलावा कोई दूसरा विकल्प न बचा हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है।

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