बिहार के भोजपुर जिले में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पुलिस ने इस मामले में मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने भरत को संरक्षण देने और कथित तौर पर अवैध हथियार छिपाने में मदद की। यह एफआईआर 17 जून को शाहपुर थाने में दर्ज की गई। दूसरी ओर, एनकाउंटर के विरोध में हुए प्रदर्शन और सड़क जाम को लेकर 14 नामजद और 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
पुलिस का दावा और वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल
पुलिस के मुताबिक, 17 जून की सुबह सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी के पास अवैध हथियार हैं और वह किसी गंभीर घटना को अंजाम दे सकता है। इसी आधार पर पुलिस टीम बेलौटी गांव पहुंची थी। पुलिस का कहना है कि घर की घेराबंदी के दौरान भरत ने हथियार के साथ पुलिस टीम पर हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद मुठभेड़ हुई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि भरत ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था, इसके बावजूद उस पर गोली चलाई गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन इसी वजह से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
सड़क जाम और प्रदर्शन पर पुलिस की सख्ती
भरत तिवारी की मौत की खबर सामने आने के बाद परिजनों और समर्थकों ने आरा-बक्सर फोरलेन पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया। कई घंटों तक सड़क जाम रहने से यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की गई। इसी आधार पर 14 लोगों को नामजद करते हुए 50 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक रंग लेने लगा मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने घटना पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय या न्यायिक जांच की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वायरल वीडियो और पुलिस के दावों में कई विरोधाभास नजर आ रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जाएगा। फिलहाल, पूरे मामले पर भोजपुर जिले समेत पूरे बिहार की नजर टिकी हुई है।
