देश सेवा का जज्बा दिल में लिए उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का एक और वीर सपूत भारत मां की गोद में हमेशा के लिए सो गया। असम में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे ने अलीगढ़ के सालपुर गांव के निवासी और भारतीय सेना के जांबाज जवान जितेंद्र शर्मा को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया। जैसे ही जितेंद्र की शहादत की खबर उनके पैतृक गांव पहुंची, पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। त्योहारों की खुशी मनाने वाले इस गांव में अचानक मातम छा गया और हर चूल्हा ठंडा पड़ गया। ग्रामीणों को यकीन ही नहीं हो रहा था कि हंसता-खेलता और देश की रक्षा का संकल्प लेने वाला उनका चहेता बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। हर कोई बस एक बार अपने शहीद नायक के अंतिम दर्शन करने के लिए उनके घर की तरफ दौड़ पड़ा।
मां की चीखें और ताबूत से लिपटी ममता
जब शहीद जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से उनके पैतृक गांव सालपुर पहुंचा, तो वहां मौजूद हजारों लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। जैसे ही तिरंगे में लिपटा ताबूत गाड़ी से नीचे उतारा गया, शहीद की बूढ़ी मां अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं। वह दौड़कर अपने कलेजे के टुकड़े के ताबूत से लिपट गईं और दहाड़े मारकर रोने लगीं। मां की बेबसी और चीखें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मां बार-बार अपने बेटे का चेहरा देखने की जिद कर रही थी और कह रही थी कि उसका बेटा उसे छोड़कर कहीं नहीं जा सकता। पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। इस गमगीन माहौल ने वहां मौजूद सख्त दिल फौजियों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी भीतर तक झकझोर कर रख दिया।
राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई
शहीद जितेंद्र शर्मा की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, जितेंद्र तेरा नाम रहेगा’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से पूरा अलीगढ़ गूंज उठा। देशभक्ति के इन नारों के बीच शहीद के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। उनके घर से करीब 200 मीटर दूर स्थित एक खेत में अंतिम संस्कार की तैयारियां की गई थीं। वहां सेना के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और अंतिम सलामी दी। जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने भी शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ शहीद के बड़े भाई ने नम आंखों से उन्हें मुखाग्नि दी। पंचतत्व में विलीन होते ही जितेंद्र हमेशा के लिए अमर हो गए।
देश के लिए सर्वोच्च बलिदान और कभी न भूलने वाली कमी
असम में हुआ यह विमान क्रैश सिर्फ एक तकनीकी हादसा नहीं था, बल्कि इसने देश के एक होनहार रक्षक को असमय ही हमसे छीन लिया। जितेंद्र शर्मा ने हमेशा अपनी ड्यूटी को सर्वोपरि रखा और देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनका यह सर्वोच्च बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। हालांकि, इस हादसे ने उनके परिवार को एक ऐसा जख्म दिया है जो कभी नहीं भर सकता। बड़ा भाई जिसने जितेंद्र को अपने हाथों से मुखाग्नि दी, वह भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था। सालपुर गांव ने भले ही अपना एक बेटा खो दिया हो, लेकिन आज पूरे जिले और देश को जितेंद्र की शहादत पर गर्व है। भारत मां का यह लाडला हमेशा देशवासियों के दिलों में जिंदा रहेगा।
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