पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समझौता पूरा हो चुका है और इसके साथ ही दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ट्रंप ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की घोषणा करते हुए कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य बनाने के लिए जहाजों की आवाजाही जल्द बहाल होगी। हालांकि, समझौते के सभी आधिकारिक दस्तावेज अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं और अंतिम हस्ताक्षर की प्रक्रिया बाकी है।
पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने खुद को अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि लंबे दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई है। उनके मुताबिक, समझौते में लेबनान से जुड़े मोर्चे भी शामिल हैं और सभी पक्षों ने सैन्य अभियानों को तत्काल प्रभाव से रोकने का फैसला किया है। शहबाज शरीफ ने बताया कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान समझौते की शर्तों, क्षेत्रीय सुरक्षा और आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
चार महीने की जंग के बाद आई सुलह की खबर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 से मानी जा रही है। इस दौरान कई बड़े सैन्य हमले, जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव देखने को मिले। अप्रैल में दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन बीच-बीच में हालात फिर बिगड़ते रहे। हाल ही में ईरान की ओर से अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने की घटना के बाद तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया था। इसके बावजूद पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास जारी रहे। अब ट्रंप के ऐलान के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि महीनों से जारी संघर्ष पर विराम लग सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते का असली असर तभी दिखेगा, जब सभी पक्ष आधिकारिक रूप से इसकी शर्तों को स्वीकार कर अमल शुरू करेंगे।
होर्मुज खुलने से दुनिया को क्या होगा फायदा?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों से इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। अब अगर होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे भारत समेत कई देशों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन और महंगाई पर पड़ता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि समझौते की सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में जमीन पर हालात कितने स्थिर रहते हैं।
