सबसे ज्यादा खरीदा गया कच्चा तेल
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से खरीदे गए कुल ऊर्जा उत्पादों में सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का था। भारत ने मई में बड़ी मात्रा में रूसी क्रूड ऑयल खरीदा, जिससे देश के कुल तेल आयात में भी बढ़ोतरी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस का तेल दूसरे देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है, इसलिए भारतीय रिफाइनरियां इसकी ज्यादा खरीद कर रही हैं। इससे कंपनियों को लागत कम रखने और बेहतर मुनाफा कमाने में मदद मिलती है।
रिफाइनरियों में बढ़ी रूसी तेल की सप्लाई
गुजरात और ओडिशा की कई बड़ी रिफाइनरियों में मई के दौरान रूसी तेल की सप्लाई बढ़ी है। जामनगर, वाडिनार और पारादीप जैसी रिफाइनरियों ने पहले के मुकाबले ज्यादा रूसी तेल प्राप्त किया। कुछ सरकारी रिफाइनरियों ने भी फिर से रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया है। इससे पता चलता है कि भारतीय कंपनियां सस्ती और भरोसेमंद सप्लाई को प्राथमिकता दे रही हैं। इसी वजह से रूस भारत के लिए तेल का एक बड़ा स्रोत बना हुआ है।
भारत की जरूरतें सबसे पहले
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत ने हमेशा कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले लेगा। यही कारण है कि भारत रूस से तेल खरीदता रहा है। जानकारों का मानना है कि सस्ते तेल की वजह से भारत को ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। साथ ही भारतीय रिफाइनरियां तेल को प्रोसेस कर दूसरे देशों को भी पेट्रोलियम उत्पाद बेच रही हैं। इसलिए रूस से तेल आयात भारत की ऊर्जा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
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