मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ा राज्यसभा चुनाव विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद न्यायालय उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यह मामला उनके राज्यसभा नामांकन रद्द होने से जुड़ा है, जिसके बाद उन्होंने न्यायिक राहत की मांग की थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और मामला और अधिक गर्माता दिख रहा है।
चुनाव आयोग पर 48 घंटे तक जवाब न देने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर 48 घंटे तक कोई जवाब नहीं दिया गया। उनका कहना है कि इस देरी से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। मीनाक्षी नटराजन के मुताबिक, यदि समय पर जवाब दिया जाता तो स्थिति अलग हो सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी महसूस हुई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोर्ट की सुनवाई पर संतोष, लेकिन फैसले से असहमति
कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan ने कहा कि अदालत ने उनकी बात सुनी, यह अपने आप में सकारात्मक बात है, लेकिन वह कोर्ट के अंतिम फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उनका पूरा भरोसा है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में जो घटनाक्रम हुआ, वह चिंताजनक है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है कि क्या चुनाव प्रक्रिया के दौरान शिकायतों का समय पर समाधान होना चाहिए या नहीं। इस मुद्दे पर अब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच भी बयानबाजी तेज हो सकती है।
नामांकन रद्द होने से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां जांच के बाद मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन रद्द कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना से जुड़े एक पुराने मामले की जानकारी पूरी तरह नहीं दी थी। इसी आधार पर उनका नामांकन खारिज किया गया। इसके बाद यह सीट भाजपा उम्मीदवार के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति में चली गई। मीनाक्षी नटराजन ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद यह मामला पूरी तरह समाप्त होता नजर आ रहा है, हालांकि राजनीतिक बयानबाजी अभी जारी है।
