बिहार की राजधानी पटना से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश के सबसे लोकप्रिय और चर्चित शिक्षकों में शुमार फैजल खान उर्फ खान सर इस समय अपनी जिंदगी के सबसे बड़े और गंभीर कानूनी संकट में घिर चुके हैं। मामला पटना में उनके ‘खान ग्लोबल स्टडीज इंस्टीट्यूट’ के बाहर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग और हिंसक झड़प से जुड़ा है। इस घटना ने न सिर्फ शिक्षा जगत को हिलाकर रख दिया है, बल्कि खान सर की रातों की नींद भी उड़ा दी है। पटना पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए खान सर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमों की झड़ी लगा दी है। फिलहाल पुलिस प्रशासन बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचते हुए खान सर के आत्मसमर्पण (Surrender) करने का इंतजार कर रहा है।
हत्या के प्रयास की धारा 109 का फंदा, आखिर कितने साल सलाखों के पीछे गुजारने होंगे?
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो पटना पुलिस ने खान सर पर जो सबसे खतरनाक कानूनी शिकंजा कसा है, वह है बीएनएस (BNS) की धारा 109। यह धारा सीधे तौर पर ‘हत्या के प्रयास’ (Attempt to Murder) से संबंधित है। सरल शब्दों में कहें तो जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी की जान लेने की नीयत से हमला करता है और पीड़ित खुशकिस्मती से बच जाता है, तब यह कड़ा कानून लागू होता है। इस गैर-जमानती धारा के तहत अगर खान सर पर दोष साबित हो जाता है, तो उन्हें पूरे 10 साल तक की कठोर कारावास की सजा काटनी पड़ सकती है, साथ ही भारी-भरकम जुर्माना भी देना होगा। इस एक धारा ने खान सर के पूरे करियर और उनकी आजादी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
आर्म्स एक्ट की कड़क धाराएं और ‘संयुक्त जिम्मेदारी’ का वो पेचीदा पेंच
बात सिर्फ हत्या के प्रयास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मौके पर हुई गोलीबारी की वजह से खान सर पर आर्म्स एक्ट की धारा 25(9), 27 और 35 भी मढ़ दी गई है। कानून के मुताबिक, सार्वजनिक स्थान पर अवैध रूप से हथियार चमकाने या उसका इस्तेमाल करने पर धारा 25 के तहत अधिकतम 2 साल की जेल हो सकती है। वहीं, खतरनाक हथियारों का बेखौफ इस्तेमाल करने के जुर्म में धारा 27 के तहत अपराधी को कम से कम 3 साल की अनिवार्य कैद भुगतनी पड़ती है। इस पूरे मामले का सबसे बड़ा ट्विस्ट आर्म्स एक्ट की धारा 35 है, जिसे ‘संयुक्त जिम्मेदारी’ (Joint Liability) कहा जाता है। इसके तहत अगर किसी संस्थान या परिसर में हिंसा होती है, तो उसके मुख्य संचालक को भी उस अपराध में बराबर का भागीदार माना जाता है। इसी कानून के चलते कोचिंग के सर्वेसर्वा होने के नाते खान सर की मुश्किलें अब दोगुनी हो चुकी हैं।
कोर्ट में सरेंडर की तैयारी या मिलेगी राहत? लीगल टीम ने झोंकी पूरी ताकत
चूंकि खान सर पर लगी ज्यादातर धाराएं पूरी तरह से गैर-जमानती (Non-Bailable) हैं, इसलिए पुलिस स्टेशन से उन्हें किसी भी कीमत पर बेल नहीं मिल सकती। अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है, तो उन्हें सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी। इसी बीच सूत्रों के हवाले से बाजार में यह चर्चा जोरों पर है कि कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए खान सर सोमवार को पटना सिविल कोर्ट में खुद को कानून के हवाले कर सकते हैं। दूसरी तरफ, खान सर की हाई-प्रोफाइल लीगल टीम भी उन्हें इस दलदल से बाहर निकालने के लिए दिन-रात एक कर रही है। वकीलों की टीम अदालत के सामने अग्रिम जमानत (Anticipatory Beli) की अर्जी दाखिल करने की पूरी तैयारी में है। हालांकि, सरेआम हुई गोलीबारी और मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट से इतनी जल्दी राहत मिलना लोहे के चने चबाने जैसा होगा। अब देखना यह है कि सोमवार का सूरज खान सर के लिए राहत की किरण लाता है या उनकी मुश्किलें और बढ़ाता है।
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