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सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद पर क्यों चला बुलडोजर? संभल में ध्वस्तीकरण के बाद मिला ऐसा सामान, मचा बवाल

संभल में सरकारी जमीन पर बनी कथित अवैध मस्जिद को कोर्ट आदेश के बाद बुलडोजर से गिराया गया। कार्रवाई के दौरान ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर मिलने से विवाद बढ़ा, पुलिस जांच जारी है।

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उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शनिवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव में बनी एक कथित अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। यह मस्जिद मुस्तफा कादरी मस्जिद के नाम से जानी जाती थी और आरोप था कि यह कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बनाई गई थी। कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई, जिसमें प्रशासन ने दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से कई घंटे तक ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। इस दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

गांव बना छावनी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

ध्वस्तीकरण कार्रवाई को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील घोषित कर दिया था। गांव में चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई और हर गतिविधि पर नजर रखी गई। स्थानीय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई और पुलिस लगातार गश्त करती रही। बताया गया कि कार्रवाई से पहले मस्जिद के भीतर अजान दी गई, जिसके बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासन का कहना था कि पूरी कार्रवाई कानून और अदालत के आदेश के अनुसार की गई है।

पोस्टर और झंडे मिलने से बढ़ा विवाद

कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से “आई लव मोहम्मद” लिखे कुछ पोस्टर और एक हरा झंडा मिलने का दावा किया गया है। इसके बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया। पुलिस ने इन सभी सामग्रियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि यह जांच की जा रही है कि ये पोस्टर और झंडे वहां कैसे पहुंचे और किसने रखे थे। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस पर स्थिति साफ होगी। इस घटना के बाद इलाके में चर्चा और तनाव दोनों बढ़ गए हैं।

कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई कार्रवाई

प्रशासन के अनुसार, यह पूरा मामला गाटा संख्या 409 की जमीन से जुड़ा है, जो कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी। जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान यहां अवैध निर्माण की बात सामने आई थी। इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया। मस्जिद समिति को दस्तावेज पेश करने का अवसर दिया गया, लेकिन पर्याप्त सबूत नहीं दिए गए। इसके बाद कोर्ट ने अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया, जिसे जिलाधिकारी न्यायालय में चुनौती दी गई, लेकिन अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने कहा कि खाली कराई गई जमीन अब ग्राम सभा के माध्यम से कब्रिस्तान के उपयोग के लिए दी जाएगी। फिलहाल इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है।

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