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‘हर LPG सिलेंडर पर 700 का घाटा!’ दाम बढ़ने पर सरकार ने बताई मजबूर

घरेलू LPG सिलेंडर के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी के बाद सरकार ने बड़ा बयान दिया है। जानिए क्यों सरकार को हर सिलेंडर पर ₹700 का नुकसान हो रहा है और कैसे भारत में गैस अब भी पाकिस्तान और अमेरिका से सस्ती है।

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देश में महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को एक और झटका लगा है। केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस (LPG) के दामों में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर अब ₹942 हो गई है। हालांकि, इस फैसले के तुरंत बाद सरकार ने अपनी सफाई भी पेश की है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल के बाद भी भारतीय उपभोक्ताओं को दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले बेहद कम कीमत पर गैस मुहैया कराई जा रही है। अगर आप प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी हैं, तो आपको साल में चार बार मिलने वाली ₹300 की सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर ₹642 में मिलेगा। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल सरकार ने इसी सब्सिडी को साल में 9 बार देने का ऐलान किया था, जिसमें अब कटौती देखी जा रही है।

मार्च से अब तक ₹89 की बड़ी बढ़ोतरी, आखिर क्या हैं अंतरराष्ट्रीय कारण?

अगर पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो आम आदमी की जेब पर बोझ लगातार बढ़ा है। इससे पहले बीते 7 मार्च को भी घरेलू रसोई गैस के दामों में ₹60 प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया था। इस तरह देखा जाए तो पिछले कुछ ही समय में रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर ₹89 तक बढ़ चुके हैं। सरकार ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव को मुख्य जिम्मेदार ठहराया है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में गैस की सप्लाई बाधित होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी का बेंचमार्क ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ फरवरी के बाद से लगभग 46 फीसदी तक उछल गया है। इसी का नतीजा है कि भारत में पहुंचने वाले एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत (Landes Cost) आज ₹1,600 के पार जा चुकी है।

तेल कंपनियों को ₹60,000 करोड़ का घाटा, सरकार ने बढ़ाया मदद का हाथ

दामों में इस बढ़ोतरी से पहले देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को हर एक सिलेंडर की बिक्री पर ₹703 का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही सिलेंडर की असली लागत ₹1,600 से अधिक है, लेकिन देश के आम उपभोक्ता सिर्फ ₹942 का भुगतान कर रहे हैं। इस बची हुई भारी भरकम रकम का बोझ सरकार और सरकारी तेल कंपनियां मिलकर उठा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी पर होने वाला यह घाटा पिछले वित्त वर्ष में ₹41,338 करोड़ था, जो अब बढ़कर करीब ₹60,000 करोड़ के पार पहुंच गया है। पेट्रोलियम कंपनियों को इस दलदल से निकालने और उनकी वित्तीय स्थिति को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने ₹30,000 करोड़ की आंशिक क्षतिपूर्ति (कंपनसेशन) पैकेज को मंजूरी दी है, ताकि बाजार में गैस की किल्लत न हो।

पाकिस्तान से लेकर अमेरिका तक का जिक्र, भारत में क्यों है गैस अब भी सस्ती?

इस पूरे मामले पर सरकार का एक बेहद दिलचस्प तर्क भी सामने आया है। केंद्र सरकार ने घरेलू गैस की कीमतों की तुलना पड़ोसी मुल्कों और दुनिया के सबसे विकसित देशों से की है। सरकार का दावा है कि आज संकट के इस दौर में भी भारत में एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसियों के मुकाबले काफी कम हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे महाशक्तियों और विकसित देशों की तुलना में भी भारतीय नागरिकों को बहुत सस्ती गैस मिल रही है। सरकार ने बताया कि देश में गैस की निर्बाध सप्लाई बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है, साथ ही अमेरिका और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त इंपोर्ट की व्यवस्था की गई है। सरकार के मुताबिक, यह मामूली मूल्य संशोधन सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि भारतीय उपभोक्ताओं पर वैश्विक मंदी और महंगाई का पूरा असर एक साथ न पड़े।

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