पश्चिम बंगाल में मुफ्त राशन पाने वाले करीब 63 लाख लोगों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य सरकार की ओर से किए गए नए फैसलों के बाद खाद्य सुरक्षा योजना पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं लोगों को मिले जो इसके लिए पूरी तरह पात्र हैं। इसी वजह से अब राशन कार्डों की बड़े स्तर पर जांच शुरू की जा रही है। इस कदम के बाद लोगों के बीच चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं कि क्या सच में कई लोगों का मुफ्त राशन बंद हो सकता है।
योजना में गड़बड़ी रोकने के लिए सख्ती
राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने साफ किया है कि ‘खाद्य साथी’ योजना के तहत ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो नियमों के अनुसार पात्र नहीं हैं या जिनके दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं। विभाग का कहना है कि कई मामलों में फर्जी या गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनाए जाने की शिकायतें मिली हैं। इसी वजह से अब विशेष गहन समीक्षा (SIR 2026) के बाद सभी राशन कार्डों की जांच की जाएगी। अगर किसी व्यक्ति का नाम गलत तरीके से जुड़ा पाया गया तो उसका कार्ड रद्द कर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी अनाज सिर्फ जरूरतमंद और सही लाभार्थियों तक पहुंचे।
63 लाख लोगों की सूची की जांच शुरू
सूत्रों के अनुसार, जिन करीब 63 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनकी भी पहचान की जा रही है और उनके राशन कार्ड की जांच होगी। प्रशासनिक स्तर पर सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की सूची तैयार करें और उसकी रिपोर्ट दें। इसके बाद अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। जांच में यह देखा जाएगा कि लाभार्थी वास्तव में योजना के नियमों को पूरा करता है या नहीं। सरकार ने यह भी कहा है कि जो लोग कानूनी प्रक्रिया में हैं या नागरिकता से जुड़े मामलों में अपील कर चुके हैं, उनके कार्ड तुरंत बंद नहीं किए जाएंगे।
सख्ती के पीछे सरकार का तर्क और आगे की प्रक्रिया
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस योजना पर हर साल करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसलिए जरूरी है कि इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो। प्रशासन का मानना है कि अगर गलत लोगों को फायदा मिलता रहा तो असली जरूरतमंद पीछे रह जाएंगे। इसी वजह से भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जो आने वाले महीनों में पूरी की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरी जांच प्रक्रिया 15 जून 2026 तक पूरी कर ली जाए, ताकि उसके बाद केवल सही लाभार्थियों को ही राशन का लाभ मिल सके। इस फैसले के बाद जहां एक ओर पारदर्शिता की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर लाखों लोगों में चिंता भी बढ़ गई है।
