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हद हो गई! अब सरकारी बाल्टियां भी डकार गए TMC नेता; ‘अनोखी चोरी’ पर पुलिस का कड़ा एक्शन

पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं की अजब कारस्तानी! कोयला-बालू के बाद अब 'सरकारी बाल्टियों' पर साफ किया हाथ, पुलिस ने रंगे हाथों दबोचा।

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार और चोरियों के बड़े-बड़े मामले तो अक्सर सुर्खियां बनते हैं, लेकिन इस बार राज्य से एक बेहद हैरान और शर्मसार कर देने वाला वाकया सामने आया है। जहां एक ओर पूरा प्रदेश बालू, कोयला और मिट्टी खनन के करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच से हिल रहा है, वहीं जमीनी स्तर के नेताओं की एक ऐसी ‘अनोखी चोरी’ पकड़ी गई है जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। पूर्वी बर्दवान जिले के कालना इलाके में पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई की है, जिससे सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) को जनता के सामने भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।

गरीबों का हक डकार गए माननीय: रंगे हाथों हुई गिरफ्तारी

पूरा मामला कालना क्षेत्र की एक स्थानीय पंचायत से जुड़ा है, जहां आम जनता और गरीब परिवारों को घर-घर कचरा प्रबंधन के लिए सरकार की तरफ से मुफ्त बाल्टियां बांटी जानी थीं। लेकिन जनसेवा का दावा करने वाले टीएमसी के दो स्थानीय नेताओं, रवि किस्कू और बेचा हाजरा की नजर इन प्लास्टिक की बाल्टियों पर बिगड़ गई। आरोप है कि गरीबों के हक की इन बाल्टियों को जनता तक पहुंचाने के बजाय, दोनों नेताओं ने मिलीभगत करके भारी मात्रा में सरकारी बाल्टियों का गबन कर लिया और उन्हें एक गुप्त ठिकाने पर छिपा दिया। जब इसकी भनक प्रशासन को लगी, तो पुलिस ने जाल बिछाकर दोनों नेताओं को धर दबोचा। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की और वहां से अवैध रूप से छिपाकर रखी गई सरकारी बाल्टियों का बड़ा जखीरा भी बरामद कर लिया है।

गिरफ्तारी के बाद अजीब दलील: ‘चोरी नहीं, हम तो बांट रहे थे’

हथकड़ी लगने के बाद जब पुलिस दोनों आरोपी नेताओं को कालना उपमंडलीय अदालत में पेश करने के लिए ले जा रही थी, तब मीडिया के कैमरों के सामने एक अलग ही ड्रामा देखने को मिला। खुद को बेकसूर साबित करने के लिए नेताओं ने एक अजीबोगरीब सफाई पेश की। उनका कहना था कि वे बाल्टियां चुरा नहीं रहे थे, बल्कि वे तो इसे जनता के बीच बांटने के काम में लगे थे। नेताओं ने तर्क दिया कि बीच में चुनाव आ जाने और आचार संहिता लागू होने के कारण वितरण का काम अधूरा रह गया, जिसकी वजह से ये बाल्टियां उनके पास सुरक्षित रखी थीं। हालांकि, कालना पुलिस ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज कर दिया है, क्योंकि बाल्टियों को छुपाकर रखने और उनके अवैध भंडारण के पीछे नेताओं के पास कोई ठोस और कानूनी दस्तावेज मौजूद नहीं थे।

कोलकाता तक बढ़ीं मुश्किलें: सीआईडी की रेड से हड़कंप

टीएमसी के लिए मुश्किलें सिर्फ बर्दवान की इस अजीबोगरीब बाल्टी चोरी तक ही सीमित नहीं हैं। इसी दौरान राज्य की राजधानी कोलकाता में भी पार्टी को एक और करारा झटका लगा है। एक तरफ जहां ग्रामीण इलाकों में बाल्टी चोर नेता सलाखों के पीछे जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कोलकाता में राज्य की खुफिया एजेंसी सीआईडी (CID) की एक बड़ी टीम ने टीएमसी के कद्दावर नेता और पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के आवास पर अचानक दस्तक दे दी। बताया जा रहा है कि सीआईडी की यह कार्रवाई एक हाई-प्रोफाइल ‘सिग्नेचर फोर्जरी’ (फर्जी हस्ताक्षर) मामले से जुड़ी हुई है, जिसके सिलसिले में फिरहाद हकीम के घर पर लंबी पूछताछ और तलाशी ली गई। एक ही दिन में जमीनी स्तर पर बाल्टी चोरी और शीर्ष स्तर पर सीआईडी की इस बड़ी रेड ने तृणमूल कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है।

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