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गुस्साई भीड़ से बचने को बिस्तर के नीचे छिपा TMC नेता, फिर पुलिस को करना पड़ा रेस्क्यू

पश्चिम बंगाल के मथाभंगा में कट मनी विवाद के चलते TMC नेता पर ग्रामीणों ने घेराव किया। आरोपों के बीच नेता बिस्तर के नीचे छिपा मिला, पुलिस ने रेस्क्यू किया। जानिए पूरा मामला।

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पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले के मथाभंगा ब्लॉक-1 अंतर्गत जोरपार्की ग्राम पंचायत क्षेत्र में उस समय तनाव फैल गया जब स्थानीय लोगों ने एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े स्थानीय नेता पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री/राज्य आवास योजना के तहत घर दिलाने का वादा करके उनसे कथित तौर पर 5,000 से 20,000 रुपये तक वसूले गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह रकम “कट मनी” के रूप में ली गई, लेकिन महीनों बाद भी न तो घर मिला और न ही पैसे लौटाए गए। धीरे-धीरे यह असंतोष गुस्से में बदल गया और कई परिवार एकजुट होकर नेता के घर पहुंच गए।

गांव में अचानक बढ़ते विरोध ने स्थिति को तनावपूर्ण बना दिया। महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में लोग नेता के घर के बाहर जमा हो गए और अपने पैसे वापस करने की मांग करने लगे। आरोप है कि पहले शांत तरीके से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे उग्र रूप लेता गया और भीड़ ने घर को घेर लिया। इसी दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन तब तक मामला काफी बढ़ चुका था।

 घर में घिरे नेता का डर और पलंग के नीचे छिपने की घटना

भीड़ के बढ़ते आक्रोश और लगातार नारेबाजी के बीच आरोपी बताए जा रहे नेता ने कथित तौर पर अपने घर के अंदर शरण ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिखी तो वह एक कमरे में जाकर बिस्तर के नीचे छिप गए। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों ने देखा और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।

बताया जा रहा है कि जब ग्रामीण घर के भीतर तक पहुंच गए, तो स्थिति और गंभीर हो गई। इसी दौरान नेता ने खुद को बचाने के लिए छिपने का रास्ता चुना। कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें उसी स्थान से सुरक्षित बाहर निकाला गया। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बन गई और लोगों के बीच इस बात को लेकर भी सवाल उठने लगे कि आखिर भ्रष्टाचार के आरोपों ने स्थिति को इतना गंभीर कैसे बना दिया।

 पुलिस की कार्रवाई और जांच की शुरुआत

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए कथित आरोपी नेता को भीड़ से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और बाद में थाने ले जाया गया। अधिकारियों के अनुसार, पूरे मामले में जबरन वसूली और सरकारी योजना के नाम पर पैसे लेने के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या वास्तव में सरकारी आवास योजना के नाम पर किसी प्रकार की अवैध वसूली की गई थी या नहीं। प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि स्थिति दोबारा न बिगड़े। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि ग्रामीणों के बड़े समूह द्वारा इस तरह का विरोध और घर का घेराव एक गंभीर स्थिति मानी जा रही है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और इलाके में बढ़ता तनाव

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस घटना को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सत्तारूढ़ दल पर सवाल उठाए हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।

TMC की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। प्रशासन फिलहाल पूरे क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की नई अप्रिय स्थिति न पैदा हो। यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय विवाद न रहकर एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल के रूप में देखा जा रहा है, जहां भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और जनता के भरोसे जैसे मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।

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