उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) की कार्रवाई में गिरफ्तार कासगंज के रहने वाले शहबाज सिद्दीकी को लेकर कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद एटीएस ने उसे 18 मई को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले, जिनके आधार पर उस पर संदेह गहरा गया। गिरफ्तारी के बाद जब उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई तो कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे। अब एटीएस इस बात की पड़ताल कर रही है कि उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे और वह किस तरह के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
मोबाइल में मिले चैट और बातचीत के रिकॉर्ड
सूत्रों के मुताबिक, शहबाज के मोबाइल फोन से कुछ चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि वह कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में था। बताया जा रहा है कि फोन में मौजूद बातचीत और मैसेज अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं ताकि उनकी पूरी सच्चाई सामने आ सके। एटीएस अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल सबूत इस मामले की सबसे अहम कड़ी साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहराई से जांच की जा रही है।
पूछताछ में सामने आए कई अहम दावे
एटीएस की पूछताछ में आरोपी ने कई बातें बताई हैं, जिनकी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उसने माना है कि वह कुछ कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित था और सोशल मीडिया के जरिए कुछ लोगों के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसे लगातार भड़काऊ वीडियो और संदेश भेजे जाते थे। अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि वह केवल ऑनलाइन बातचीत तक सीमित था या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी बन चुका था। जांच एजेंसियां उसके बयानों का मिलान मोबाइल फोन से मिले सबूतों और अन्य तकनीकी जानकारियों से कर रही हैं।
क्या और लोग भी जुड़े हैं? जांच का दायरा बढ़ा
एटीएस को शक है कि इस मामले में सिर्फ एक व्यक्ति शामिल नहीं हो सकता। इसी वजह से शहबाज के संपर्क में रहे लोगों की भी पहचान की जा रही है। कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया कनेक्शन और अन्य डिजिटल डेटा की मदद से पूरे नेटवर्क को समझने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अधिकारी हर पहलू को ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश है कि अगर कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है तो उसे समय रहते बेनकाब किया जा सके।
