उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर चर्चा छेड़ दी है, बल्कि इस पर एक नया सियासी विवाद भी खड़ा कर दिया है। 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले 17 वर्षीय छात्र सूर्या चौहान की बेरहमी से की गई हत्या के मुख्य आरोपी असद को पुलिस ने एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। रविवार तड़के हुई इस पुलिस मुठभेड़ में असद के सीने में गोली लगी थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद से ही इलाके में तनाव और सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखे जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इस एनकाउंटर को लेकर अब राजनीति भी गरमाने लगी है।
मामूली सी बहस और फिर खूनी अंजाम
यह पूरी घटना गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र की है, जहां रहने वाले सूर्या चौहान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मृतक सूर्या और मुख्य आरोपी असद आपस में दोस्त थे। शुक्रवार (29 मई) को दोनों के बीच मोटरसाइकिल चलाने जैसी बेहद मामूली बात को लेकर विवाद शुरू हुआ था। देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि असद ने गुस्से में आकर सूर्या पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सूर्या ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार में कोहराम मचा हुआ है और वे इंसाफ की मांग कर रहे थे।
पुलिस की घेराबंदी और 50 हजार के इनामी का अंत
सूर्या के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कुल 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। वारदात के तुरंत बाद ही त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी असद मौके से फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस उपायुक्त धवल जायसवाल के मुताबिक, फरार असद की गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था। रविवार की सुबह पुलिस को मुखबिर से असद के छिपे होने की सूचना मिली। जब पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली असद के सीने में लगी और इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
‘गोली मारने का मतलब…’ – हुसैन दलवई का तीखा पलटवार
असद के इस एनकाउंटर के बाद जहां एक तरफ पुलिस इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने इस पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। इस एनकाउंटर को पूरी तरह गलत ठहराते हुए हुसैन दलवई ने कहा, “मैं एनकाउंटर की इस नीति के बिल्कुल खिलाफ हूं। किसी को भी इस तरह सीधे गोली मारने या एनकाउंटर करने का साफ मतलब है कि देश की कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लिया जा रहा है, जो कि पूरी तरह गैर-कानूनी है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा इस तरह कानून को दरकिनार कर फैसला करना समाज और संविधान के लिए एक बेहद चिंताजनक संकेत है।
