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गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा… ताजमहल में बकरीद की नमाज के बाद मुस्लिम समाज की बड़ी मांग

आगरा में बकरीद के मौके पर ताजमहल की शाही मस्जिद में नमाज अदा की गई। वहीं मुस्लिम महापंचायत ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाकर भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया।

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UP News: मोहब्बत की नगरी आगरा में इस बार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार सिर्फ धार्मिक उत्साह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश भी देता नजर आया। गुरुवार सुबह ताजमहल की शाही मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ नमाज अदा कर देश में शांति, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। तेज गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह देखने लायक था। इस दौरान ताजमहल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी और अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से पूरे इलाके की निगरानी की गई। प्रशासन की कोशिश थी कि त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो।

मुस्लिम महापंचायत ने उठाई गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग

बकरीद के मौके पर इस बार आगरा में एक अलग तस्वीर भी देखने को मिली। नमाज के बाद उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के सदस्यों ने ईदगाह के बाहर प्रदर्शन कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई। बड़ी संख्या में लोग हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर पहुंचे। उनका कहना था कि गाय देश की संस्कृति और करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए उसकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महापंचायत के सरपंच नदीम नूर और पदाधिकारी अमजल कुरैशी ने कहा कि इस्लाम इंसानियत, भाईचारे और सम्मान का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज भी गाय के साथ किसी तरह की क्रूरता या अपमान का समर्थन नहीं करता। उन्होंने सरकार से मांग की कि देश में गौ तस्करी और गायों के साथ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इस पहल को कई लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने वाली पहल बताया।

‘आगरा की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने की कोशिश’

मुस्लिम महापंचायत के नेताओं ने कहा कि आगरा हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल रहा है। यहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाते आए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। महापंचायत के सदस्यों का कहना था कि इस तरह की पहल का मकसद किसी विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि समाज में भरोसा और भाईचारा बढ़ाना है। बकरीद के मौके पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने देश में अमन और खुशहाली की दुआ की। लोगों ने कहा कि त्योहार हमें एक-दूसरे के करीब लाने का काम करते हैं। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की अपील की। सोशल मीडिया पर भी इस पहल की काफी चर्चा देखने को मिली और लोग इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं।

ताजमहल में मुफ्त एंट्री और हाई सिक्योरिटी व्यवस्था

ईद-उल-अजहा के मौके पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ताजमहल में सुबह तीन घंटे तक मुफ्त प्रवेश की सुविधा दी। सुबह सात बजे से दस बजे तक टिकट विंडो बंद रखी गई, ताकि नमाजी और पर्यटक आसानी से अंदर जा सकें। इस दौरान बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक भी ताजमहल पहुंचे। प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर विशेष तैयारी की थी। ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर बनी रही, ताकि किसी तरह की अफवाह न फैले। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। बकरीद के इस मौके पर आगरा से जो तस्वीर सामने आई, उसने एक बार फिर यह संदेश दिया कि त्योहार सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं।

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