कर्नाटक की राजनीति में कई महीनों से चल रही अटकलों के बीच अब सत्ता परिवर्तन की तस्वीर लगभग साफ होती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को हुई अहम बैठक में साफ संकेत दे दिए कि वह पार्टी हाईकमान के फैसले के अनुसार कदम उठाएंगे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने अब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन का मन बना लिया है और इसी के तहत उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कई दौर की बैठकों के बाद यह फैसला अंतिम रूप तक पहुंचा। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि पार्टी 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए सत्ता साझेदारी के वादे को पूरा करे। यही वजह है कि अब सिद्धारमैया के इस्तीफे और डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे कांग्रेस के अंदर संतुलन बनाने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है।
‘राहुल गांधी जो कहेंगे वही करूंगा’, सिद्धारमैया का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान अपने सहयोगियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह वही करेंगे जो राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व तय करेगा। उन्होंने सभी मंत्रियों का धन्यवाद किया और संकेत दिया कि वह जल्द पद छोड़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अब किसी नए चेहरे को मौका देना चाहती है और वह हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे। बताया जा रहा है कि शुरुआत में सिद्धारमैया ने कुछ समय और मांगा था ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर दिखाई दिया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अगर सत्ता साझेदारी के वादे को पूरा नहीं किया गया तो पार्टी की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। इसी कारण अब नेतृत्व परिवर्तन को लेकर तेजी दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस इस फैसले के जरिए संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाए रखना चाहती है।
डीके शिवकुमार के समर्थन में बढ़ा माहौल
गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई ब्रेकफास्ट बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले भी लगाया। इस तस्वीर को कांग्रेस की एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल दिखाई दे रहा है। बेंगलुरु में कई जगह पोस्टर लगाए गए और समर्थकों ने मिठाइयां बांटनी शुरू कर दीं। कांग्रेस के अंदर लंबे समय से माना जा रहा था कि विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सहमति बनी थी। अब जब सिद्धारमैया तय समय से ज्यादा अवधि तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं, तो डीके शिवकुमार खेमे की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। पार्टी नेतृत्व भी नहीं चाहता कि इस मुद्दे पर किसी तरह का असंतोष खुलकर सामने आए। इसलिए दोनों नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
कर्नाटक की राजनीति में नए दौर की शुरुआत?
अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह कर्नाटक कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जाएगा। शिवकुमार को संगठन और चुनावी रणनीति का मजबूत खिलाड़ी माना जाता है। राज्य में कांग्रेस की सत्ता वापसी में उनकी भूमिका अहम रही थी। अब नेतृत्व परिवर्तन के जरिए कांग्रेस आगामी चुनावों और संगठनात्मक समीकरणों को साधने की कोशिश कर रही है। हालांकि विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और बीजेपी लगातार कांग्रेस के अंदरूनी संघर्ष को मुद्दा बना रही है। दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि पार्टी में फैसले सहमति और अनुशासन के आधार पर लिए जाते हैं। आने वाले दिनों में सिद्धारमैया के औपचारिक इस्तीफे और नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा के साथ कर्नाटक की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Read More-मोदी के करीबी नेता को बड़ी जिम्मेदारी, दिल्ली BJP को मिला नया अध्यक्ष
