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मां का कटा हाथ लेकर भटकता रहा जवान, नहीं मिला इंसाफ तो कमिश्नर ऑफिस को 50 हथियारबंद कमांडो ने घेरा

कानपुर में ITBP जवान की मां का इलाज के दौरान हाथ काटने के मामले ने तूल पकड़ लिया। जांच रिपोर्ट से नाराज 50 से ज्यादा जवानों ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया। जानिए पूरा मामला।

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कानपुर में शनिवार को उस वक्त माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब बड़ी संख्या में ITBP के जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। जवानों का गुस्सा अपनी ही फोर्स के एक कांस्टेबल की मां के साथ हुई कथित मेडिकल लापरवाही को लेकर था। मामला इतना गंभीर था कि ITBP जवानों ने अधिकारियों से सीधे जवाब मांगने के लिए कार्यालय का घेराव कर दिया। जानकारी के मुताबिक ITBP के कांस्टेबल विकास सिंह की मां का इलाज के दौरान हाथ काटना पड़ा, जिसके बाद परिवार लगातार इंसाफ की मांग कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद भी जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो जवानों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। पुलिस कमिश्नर कार्यालय के बाहर कई गाड़ियों में पहुंचे हथियारबंद जवानों को देखकर पूरे इलाके में हलचल मच गई और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।

 इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, संक्रमण बढ़ने पर काटना पड़ा हाथ

मामले की शुरुआत 13 मई से हुई, जब ITBP जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत होने पर कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके चलते उनके हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया। धीरे-धीरे हाथ काला पड़ने लगा और हालत इतनी खराब हो गई कि दूसरे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण बढ़ने की बात कहते हुए महिला का हाथ काटने का फैसला लिया। इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। विकास सिंह ने आरोप लगाया कि समय रहते सही इलाज मिलता तो उनकी मां का हाथ बचाया जा सकता था। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच टीम बनाई, लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से विवाद और बढ़ गया।

मां का कटा हाथ लेकर पहुंचा जवान

इस पूरे मामले ने तब और भावुक मोड़ ले लिया, जब विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। यह तस्वीर जिसने भी देखी, वह अंदर तक हिल गया। विकास का कहना था कि वह अपनी मां के लिए इंसाफ मांग रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल कागजी कार्रवाई में उलझे हुए हैं। पुलिस कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि रिपोर्ट में यह साफ नहीं बताया गया कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी। रिपोर्ट में केवल यह संभावना जताई गई कि खून का थक्का बनने की वजह से संक्रमण फैला हो सकता है। लेकिन यह नहीं बताया गया कि इलाज के दौरान ऐसा क्यों हुआ और क्या डॉक्टरों की कोई गलती थी। इसी बात को लेकर ITBP अधिकारियों और जवानों में नाराजगी बढ़ गई। उनका आरोप है कि जांच टीम अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों को बचाने की कोशिश कर रही है।

कार्रवाई के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला

शनिवार सुबह ITBP के करीब 50 से ज्यादा जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। वहां ITBP के कमांडेंट और अन्य अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त और अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली बातचीत के दौरान जवानों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया। बाद में अपर पुलिस आयुक्त ने कहा कि पीड़ित परिवार जिन बिंदुओं पर असंतुष्ट है, उन सभी की दोबारा जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले को लेकर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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