भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर में सोमवार को भव्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सोमनाथ अमृत पर्व-2026’ में शामिल हुए और मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर पहली बार 11 पवित्र तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक किया गया। इस ऐतिहासिक रस्म को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु, साधु-संत और कलाकार सोमनाथ पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक मंत्रोच्चार और शिवभक्ति का माहौल बना रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में विशेष महापूजा में हिस्सा लिया और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहे। इससे पहले पीएम मोदी ने सोमनाथ शहर में रोड शो भी किया, जहां लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
75 वर्ष पूरे होने पर मनाया जा रहा ‘सोमनाथ अमृत पर्व’
यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण और पुनः प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया है। चार दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव 8 मई से शुरू होकर 11 मई तक चलेगा। स्वतंत्रता के बाद देश के पहले उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था। इसे सनातन संस्कृति और भारतीय विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह के दौरान एक स्मारक डाक टिकट और विशेष स्मृति सिक्का भी जारी किया। आयोजकों के अनुसार, यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव का उत्सव है। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिसने माहौल को और भव्य बना दिया।
#WATCH | Gir Somnath, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi participates in the Somnath Amrut Mahotsav at the Somnath Temple, one of the twelve Jyotirlingas.
Somnath Amrut Mahotsav marks 75 years since the inauguration of the restored Temple.
(Source: ANI/DD) pic.twitter.com/diN7UgesFv
— ANI (@ANI) May 11, 2026
760 किलो के विशाल कलश से हुआ ऐतिहासिक कुंभाभिषेक
सोमनाथ मंदिर के शिखर पर हुए कुंभाभिषेक को इस आयोजन का सबसे खास और ऐतिहासिक क्षण माना गया। आमतौर पर दक्षिण भारत के मंदिरों में होने वाली यह परंपरा पहली बार सोमनाथ मंदिर के शिखर पर निभाई गई। इस अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से 1,100 लीटर क्षमता वाला विशाल कलश तैयार किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस कलश का वजन करीब 760 किलोग्राम था और पवित्र जल भरने के बाद इसका कुल वजन लगभग 1.86 मीट्रिक टन हो गया। आठ फीट ऊंचे इस कलश में देश के 11 प्रमुख तीर्थ स्थलों से लाया गया जल रखा गया। मंदिर के ऊंचे शिखर तक इसे पहुंचाने के लिए 350 टन क्षमता वाली ऑल-टेरेन क्रेन का इस्तेमाल किया गया। क्रेन के बूम को विशेष रूप से 90 मीटर ऊंचाई तक पहुंचने के लिए तैयार किया गया था। जैसे ही शिखर पर जल चढ़ाया गया, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
सनातन परंपरा और आधुनिक तकनीक का दिखा अनोखा संगम
सोमनाथ अमृत महोत्सव में एक ओर जहां प्राचीन धार्मिक परंपराओं का पालन हुआ, वहीं दूसरी ओर आधुनिक तकनीक का भी शानदार उपयोग देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे लोगों का कहना था कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान है। सोमनाथ मंदिर का इतिहास कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों से जुड़ा रहा है, लेकिन आज यह मंदिर देश की आस्था, संस्कृति और आत्मगौरव का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी ने इस आयोजन को और खास बना दिया। माना जा रहा है कि ‘सोमनाथ अमृत पर्व-2026’ आने वाले समय में देश के सबसे यादगार धार्मिक आयोजनों में गिना जाएगा।
