जम्मू-कश्मीर में रिहायशी इलाकों के आसपास शराब की दुकानों को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार पर निशाना साध रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकार घाटी की सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने भी शराब की दुकानों के खिलाफ नाराजगी जताई है। इस पूरे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सामने आकर सफाई दी और कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने माना कि जल्दबाजी में दिए गए जवाब की वजह से विवाद खड़ा हुआ, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार शराब को बढ़ावा देने के पक्ष में नहीं है और न ही नई शराब की दुकानों को खोलने की कोई योजना है।
‘मेरी गलती थी…’ कहकर उमर अब्दुल्ला ने दी सफाई
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अक्सर सड़क किनारे पत्रकारों से बातचीत के दौरान समय कम होता है और उसी जल्दबाजी में उनके जवाब का गलत मतलब निकाल लिया गया। उन्होंने कहा कि “इसमें गलती मेरी है”, क्योंकि जो बात विस्तार से समझाई जानी चाहिए थी, वह संक्षेप में रह गई। उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानें कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के समय भी ये दुकानें मौजूद थीं और किसी ने इन्हें पूरी तरह बंद नहीं किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने अब तक कोई नई शराब की दुकान नहीं खोली है। साथ ही यह कोशिश की गई है कि ऐसी दुकानें उन जगहों पर न हों जहां युवाओं पर गलत असर पड़ सकता हो। उन्होंने दोहराया कि सरकार समाज में शराब के इस्तेमाल को बढ़ावा नहीं देना चाहती।
‘ये दुकानें सबके लिए नहीं’, धार्मिक पहलू पर भी बोले सीएम
उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान में धार्मिक पहलू का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस्लाम शराब पीने की अनुमति नहीं देता और व्यक्तिगत रूप से भी वह नहीं चाहते कि लोग इस दिशा में जाएं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग धर्मों और सोच के लोग रहते हैं। यहां देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले पर्यटक और बाहरी लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसे में शराब की दुकानें उन्हीं लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर संचालित की जाती हैं जिनके धर्म या जीवनशैली में इसकी अनुमति है। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि इन दुकानों का उद्देश्य स्थानीय लोगों को शराब की तरफ प्रेरित करना नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष उनके बयान को जानबूझकर गलत तरीके से पेश कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि पिछली सरकारों के समय भी यही नीति लागू थी।
विपक्ष पर पलटवार, पुरानी सरकारों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि जो पार्टियां आज उनकी आलोचना कर रही हैं, उन्होंने सत्ता में रहते हुए इस मुद्दे पर कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा के रिकॉर्ड में ऐसे बयान मौजूद हैं, जहां पूर्व सरकारों के मंत्रियों ने भी शराब दुकानों को लेकर लगभग यही बात कही थी। उमर अब्दुल्ला ने विशेष रूप से पीडीपी सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके तत्कालीन वित्त मंत्री ने सदन में इसी तरह की बात कही थी। मुख्यमंत्री का कहना है कि आज विपक्ष अपनी पुरानी नीतियों और फैसलों को छुपाने के लिए उनकी बातों को विवाद का रूप दे रहा है। फिलहाल शराब की दुकानों का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
