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कुर्सी जाते ही ‘अकड़’ गायब! TMC से बाहर होते ही रिजू दत्ता ने IPS अजय पाल शर्मा से मांगी माफी,  कहा-“मुझसे…”

TMC से सस्पेंड होते ही बदले रिजू दत्ता के सुर, IPS अजय पाल शर्मा से हाथ जोड़कर मांगी माफी। जानें क्या है बंगाल चुनाव और यूपी के 'सिंघम' से जुड़ा यह पूरा विवाद।

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राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती और यह बात तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व प्रवक्ता रिजू दत्ता पर सटीक बैठती है। अपनी ही पार्टी से 6 साल के लिए सस्पेंड किए जाने के कुछ ही घंटों बाद रिजू दत्ता के तेवर पूरी तरह ठंडे पड़ गए हैं। उत्तर प्रदेश के चर्चित ‘सिंघम’ IPS अजय पाल शर्मा को खुलेआम धमकी देने वाले रिजू अब सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर माफी मांगते नजर आ रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जो कुछ भी उन्होंने कहा था, वह उनकी निजी राय नहीं बल्कि पार्टी का ‘आदेश’ था। इस माफीनामे ने बंगाल से लेकर यूपी तक की सियासत में हलचल तेज कर दी है।

पार्टी से बाहर होते ही फूटा दर्द, बोले- “मुझ पर थोपी गई थी स्क्रिप्ट”

रिजू दत्ता ने अपने ‘X’ हैंडल पर एक वीडियो साझा करते हुए सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि IPS अजय पाल शर्मा के खिलाफ उन्होंने जो भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, वह टीएमसी की आधिकारिक ‘पार्टी लाइन’ का हिस्सा थी। रिजू के मुताबिक, वह वीडियो पार्टी मुख्यालय में शूट किया गया था और उसे टीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ही प्रमोट किया गया था। अब जबकि पार्टी ने उन्हें किनारे कर दिया है, तो रिजू का कहना है कि वह बलि का बकरा नहीं बनना चाहते। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक प्रवक्ता के तौर पर उन्हें जो स्क्रिप्ट दी गई थी, उन्होंने बस वही दोहराया था, इसमें उनकी व्यक्तिगत कोई शत्रुता नहीं थी।

कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा और क्यों भड़की थी TMC?

यह पूरा विवाद बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना की फलता विधानसभा सीट पर पुलिस ऑब्जर्वर नियुक्त किया था। वहां टीएमसी नेता जहांगीर खान पर डराने-धमकाने के आरोप लगे थे, जिसके बाद अजय पाल शर्मा खुद उनके घर पहुंच गए थे। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि अगर हिंसा हुई तो अंजाम बुरा होगा। इस सख्त रवैये से नाराज होकर रिजू दत्ता ने तब वीडियो जारी कर कहा था कि ‘4 मई के बाद बीजेपी आपको नहीं बचा पाएगी, हम आपको यूपी से बंगाल खींच लाएंगे।’ अब उसी बयान पर रिजू का कहना है कि वह एक सामान्य इंसान हैं और अपने परिवार के साथ शांति से रहना चाहते हैं।

अपनों ने छोड़ा साथ, अब कानूनी सलाह के बाद झुके रिजू

हैरानी की बात यह है कि रिजू दत्ता पर गाज तब गिरी जब उन्होंने चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC और पार्टी नेतृत्व (ममता और अभिषेक बनर्जी) के बीच के तालमेल पर सवाल उठाए। जैसे ही अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें 6 साल के लिए बाहर किया गया, भाजपा समर्थकों ने पुराने बयानों को लेकर उन्हें घेरना शुरू कर दिया। रिजू ने वीडियो में स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं और उनके कानूनी सलाहकारों ने उन्हें सलाह दी कि वह इस मामले को कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए तुरंत माफी मांग लें। उन्होंने कहा, “मैं अब किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता, मुझे उम्मीद है कि अजय पाल शर्मा जी बड़ा दिल दिखाते हुए इस अध्याय को यहीं बंद कर देंगे।”

चुनावी रंजिश और सस्पेंशन के पीछे की इनसाइड स्टोरी

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे फलता विधानसभा की वह सियासी तपिश है, जहां चुनाव आयोग ने 21 मई को पुनर्मतदान (Re-polling) का आदेश दिया है। रिजू दत्ता का निष्कासन केवल एक प्रवक्ता का जाना नहीं है, बल्कि यह टीएमसी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह का भी संकेत है। रिजू ने जिस तरह से अपनी ही पार्टी पर ‘दबाव में बयान दिलवाने’ का आरोप लगाया है, उससे ममता बनर्जी की पार्टी की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, अजय पाल शर्मा की ओर से इस माफीनामे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर रिजू दत्ता का यह ‘यू-टर्न’ तेजी से वायरल हो रहा है।

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