पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार बनने और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में सत्ता परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई। इस राजनीतिक बदलाव के तुरंत बाद अलग-अलग दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
संजय राउत का बीजेपी पर बड़ा आरोप
संजय राउत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी अपनी राजनीतिक परंपरा को लगातार बनाए हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है, जिनके खिलाफ पहले खुद पार्टी ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे। राउत के अनुसार, बीजेपी का यह व्यवहार उसकी राजनीति में विरोधाभास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ पहले पार्टी स्तर पर अभियान चलाया गया था, अब उसी को सत्ता के शीर्ष पर बैठा दिया गया है, जो कई सवाल खड़े करता है।
पुराने आरोपों को लेकर फिर से उठाया मुद्दा
संजय राउत ने अपने बयान में दावा किया कि शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ पहले भी गंभीर आरोप लगाए गए थे और पार्टी स्तर पर उनके खिलाफ मुहिम चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय सोशल मीडिया और पार्टी मंचों पर भी उन पर सवाल उठाए गए थे। राउत ने यह भी कहा कि बाद में जब राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं, तो वही व्यक्ति बीजेपी में शामिल हो गया और अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गया है। उनके अनुसार यह भारतीय राजनीति में एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि क्या विचारधारा से ज्यादा राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
बीजेपी की परंपरा पर तंज
संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में बाहर से आने वाले नेताओं को ऊंचे पद देने की एक खास परंपरा बन चुकी है, जिसे अब भी जारी रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति पर भी टिप्पणी की और कहा कि वहां राजनीतिक समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं। उन्होंने कांग्रेस और डीएमके के गठबंधन को लेकर कहा कि राजनीतिक फैसले परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं और धीरे-धीरे स्थिति स्पष्ट हो जाती है। राउत के इन बयानों के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
