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कौन है वो बुजुर्ग जिसके आगे झुक कर देश के प्रधानमंत्री मोदी ने छुए पैर? जानकार रह जाएंगे हैरान

शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में पीएम मोदी ने जिस बुजुर्ग के पैर छुए, जानिए कौन हैं माखनलाल सरकार और उनका योगदान।

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कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे कार्यक्रम की दिशा ही बदल दी। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे, उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति को देखकर न सिर्फ उन्हें शॉल ओढ़ाई, बल्कि झुककर उनके पैर भी छुए और फिर गले लगाकर काफी देर तक उनसे बातचीत करते रहे। इस भावुक और सम्मान से भरे पल ने वहां मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी। हर कोई यही जानना चाहता था कि आखिर वह बुजुर्ग कौन हैं, जिनके प्रति प्रधानमंत्री ने इतना सम्मान जताया।

कौन हैं माखनलाल सरकार? 

जिस बुजुर्ग को प्रधानमंत्री ने सम्मान दिया, वे माखनलाल सरकार हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में गिना जाता है। लगभग 98 वर्ष की आयु में भी वे पार्टी और विचारधारा से जुड़े हुए हैं। उनका जीवन देशभक्ति और संगठन के लिए समर्पण का उदाहरण रहा है। वे सिलीगुड़ी के निवासी हैं और लंबे समय से राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ सक्रिय रहे हैं। उनकी पहचान सिर्फ एक कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में है जिन्होंने देश के लिए कई संघर्षों का सामना किया।

संघर्ष और समर्पण से भरी रही जिंदगी

माखनलाल सरकार का नाम उस दौर से जुड़ा है, जब देश में राष्ट्रवादी आंदोलनों की गूंज थी। वर्ष 1952 में वे कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन में शामिल हुए थे, जहां उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। उस समय वे प्रमुख नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ थे और उनकी अंतिम यात्रा का भी हिस्सा बने। एक घटना में उन्हें राष्ट्रवादी गीत गाने के कारण गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्होंने अदालत में माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। इसके बजाय उन्होंने अदालत में वही गीत दोबारा गाया। उनके इस साहस और समर्पण को देखते हुए न्यायाधीश भी प्रभावित हुए। यह घटनाएं उनके मजबूत इरादों और देशभक्ति को दर्शाती हैं।

संगठन में अहम भूमिका, हजारों कार्यकर्ता जोड़े

माखनलाल सरकार ने न सिर्फ आंदोलनों में भाग लिया, बल्कि संगठन को मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभाई। 1980 में भाजपा के गठन के बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल के कई जिलों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने बहुत कम समय में हजारों लोगों को पार्टी से जोड़ा और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। लगातार कई वर्षों तक उन्होंने जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो उस समय एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। आज भी उन्हें पार्टी के एक मजबूत स्तंभ के रूप में देखा जाता है। प्रधानमंत्री का उनके प्रति सम्मान जताना उनके लंबे योगदान और समर्पण की पहचान माना जा रहा है।

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