पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां Suvendu Adhikari को मुख्यमंत्री पद के लिए चुने जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा और वह महज 80 सीटों पर सिमट गई। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा ने सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है और विधायक दल की बैठक में नए नेता के नाम पर मुहर लगा दी गई है।
9 मई को होगा भव्य शपथग्रहण समारोह
नई सरकार का शपथग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के Brigade Parade Ground में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और भव्य बनाने की तैयारी जोरों पर है। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, भाजपा के वरिष्ठ नेता, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कई केंद्रीय मंत्री शामिल हो सकते हैं। खास बात यह है कि यह दिन Rabindranath Tagore की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया है।
पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुआ फैसला
भाजपा ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। उनकी मौजूदगी में हुई बैठक में सर्वसम्मति से सुवेंदु अधिकारी के नाम पर सहमति बनी। यह फैसला पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुवेंदु अधिकारी लंबे समय से बंगाल की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और जमीनी स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
50 साल बाद दोहराया जाएगा इतिहास
पश्चिम बंगाल में लगभग पांच दशक बाद ऐसा मौका आया है जब केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार बनने जा रही है। इससे पहले यह स्थिति Siddhartha Shankar Ray के कार्यकाल के दौरान देखने को मिली थी, जब राज्य और केंद्र दोनों में कांग्रेस की सरकार थी। इस बार भाजपा की जीत ने न केवल राजनीतिक समीकरण बदले हैं, बल्कि राज्य की नीतियों और प्रशासनिक दिशा में भी बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।
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