पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अलग पहचान बनाने वाली ममता बनर्जी हमेशा अपने सादगी भरे जीवन के लिए चर्चा में रही हैं। लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने एक भी रुपये की सैलरी नहीं ली—यह बात अक्सर लोगों को हैरान करती है। आमतौर पर इतने बड़े पद पर बैठे नेता सरकारी वेतन और सुविधाओं पर निर्भर होते हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने इस परंपरा को तोड़ा। यही वजह है कि लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बिना वेतन के उनका गुजारा कैसे चलता था। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह चर्चा फिर से तेज हो गई है, खासकर जब उनके भविष्य की पेंशन को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं।
किताबें, पेंटिंग और गाने—कमाई के अनोखे जरिये
ममता बनर्जी का जीवन सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खुद कई बार बताया है कि उनकी आय का मुख्य स्रोत रचनात्मक कार्य रहे हैं। वह एक सक्रिय लेखिका हैं और अब तक 100 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं। इन किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी उनकी आय का बड़ा हिस्सा रही है, जिससे उन्हें हर साल करीब 10 से 11 लाख रुपये तक की कमाई होती रही। इसके अलावा वह पेंटिंग भी करती हैं—उनकी बनाई पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगती है और उनसे मिलने वाली राशि का एक हिस्सा वह दान कर देती हैं, जबकि कुछ रकम अपनी जरूरतों के लिए रखती हैं। इतना ही नहीं, वह गीत लेखन भी करती हैं और इसके बदले उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये तक मिलते हैं। इन सभी स्रोतों के सहारे उन्होंने बिना सरकारी वेतन के भी अपना जीवन सहज तरीके से चलाया।
अब पेंशन को लेकर क्या कहते हैं नियम?
अगर ममता बनर्जी भविष्य में पेंशन लेने का निर्णय करती हैं, तो उन्हें एक अच्छी-खासी राशि मिल सकती है। वह कई बार सांसद रह चुकी हैं, और नियमों के मुताबिक पूर्व सांसदों को न्यूनतम 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है। इसके अलावा हर अतिरिक्त वर्ष के लिए 2,500 रुपये जुड़ते हैं। उनके लंबे संसदीय अनुभव को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि उनकी सांसद पेंशन करीब 80,000 से 1 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है। इसके अलावा वह विधायक और मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं, जिसके आधार पर अलग-अलग पेंशन और सुविधाओं का प्रावधान होता है। हालांकि अलग-अलग पदों की पेंशन एक साथ नहीं मिलती, बल्कि आमतौर पर एक ही विकल्प चुनना होता है।
सुविधाएं भी कम नहीं, लेकिन फैसला उनका
पेंशन के अलावा एक पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें कई अन्य सुविधाओं का अधिकार होता है, जैसे सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, स्टाफ और सरकारी आवास। हालांकि इन सबके बावजूद यह पूरी तरह उनके ऊपर निर्भर करता है कि वह इन लाभों का उपयोग करना चाहती हैं या नहीं। उनके पिछले फैसलों को देखते हुए यह कहना मुश्किल नहीं है कि वह सादगी को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने खुद कहा था कि अकेले होने के कारण उनकी जरूरतें सीमित हैं और जितनी कमाई होती है, उसी में उनका काम चल जाता है। ऐसे में अगर वह पेंशन लेने का फैसला करती हैं, तो यह उनके लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा हो सकती है, न कि जरूरत।
