पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। करीब डेढ़ दशक तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारा झटका लगा है और भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसका मतलब साफ है कि अब राज्य में सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है। इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और हर किसी को इसे स्वीकार करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी संकेत दिया कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल बने हुए हैं।
गिनती की रफ्तार पर उठाए सवाल
अभिषेक बनर्जी ने मतगणना की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इस बार वोटों की गिनती असामान्य रूप से धीमी रही है। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि पिछली बार 2021 में जहां करीब 90 प्रतिशत गिनती कुछ ही घंटों में पूरी हो गई थी, वहीं इस बार उसी समय में केवल कुछ ही राउंड पूरे हो पाए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और काउंटिंग एजेंटों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी हालत में काउंटिंग सेंटर न छोड़ें। उनके अनुसार, कुछ जगहों पर नतीजों की जानकारी समय पर साझा नहीं की जा रही है, जिससे भ्रम की स्थिति बन रही है।
EVM डेटा और दोबारा गिनती पर भी सवाल
चुनाव परिणामों के बीच तृणमूल कांग्रेस ने कुछ तकनीकी मुद्दों को भी उठाया है। अभिषेक बनर्जी के अनुसार, कुछ इलाकों में EVM के डेटा और फॉर्म 17C के आंकड़ों में मेल नहीं दिख रहा है। उन्होंने खास तौर पर कल्याणी क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कई मशीनों के डेटा में अंतर पाया गया है। इसके अलावा, बर्धमान दक्षिण जैसे क्षेत्रों में जीत मिलने के बावजूद दोबारा गिनती किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन बिंदुओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक तनाव के बीच बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राज्य में राजनीतिक तनाव भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रहीं और उन्होंने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं अभिषेक बनर्जी जब हेस्टिंग्स काउंटिंग सेंटर पहुंचे, तो चुनाव आयोग ने उन्हें वहां से जाने के लिए कहा क्योंकि वे उम्मीदवार नहीं थे। दूसरी ओर, रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा ने मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल जैसे इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया है, जो पहले TMC के गढ़ माने जाते थे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे राजनीतिक स्थिति किस दिशा में जाती है और क्या इस परिणाम के बाद राज्य की राजनीति में स्थायी बदलाव देखने को मिलेगा।
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