पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा लगाए गए आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। पार्टी ने दावा किया कि स्ट्रांग रूम में रखी मतपेटियों को अवैध तरीके से खोला गया। इस आरोप के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि, इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने साफ तौर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी प्रक्रियाएं तय नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार ही पूरी की गई हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है।
स्ट्रांग रूम खोलने की वजह क्या थी?
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, खुदीराम अनुशीलन केंद्र में कुल आठ स्ट्रांग रूम बनाए गए हैं। इनमें से सात स्ट्रांग रूम में उत्तरी कोलकाता के सात विधानसभा क्षेत्रों की ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई हैं। वहीं आठवां स्ट्रांग रूम केवल डाक मतपत्रों के लिए निर्धारित है। अधिकारियों ने बताया कि इस स्ट्रांग रूम को खोलने का उद्देश्य डाक मतपत्रों को अलग करना था, ताकि उन्हें संबंधित जिलों में भेजा जा सके। यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे चुनावी प्रोटोकॉल के तहत ही किया जाता है।
राजनीतिक दलों की मौजूदगी में हुआ पूरा काम
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि स्ट्रांग रूम खोलने की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की गई। नियमों के अनुसार, इस दौरान सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था, जिसमें TMC के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया। अधिकारियों ने कहा कि सहायक रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की निगरानी में डाक मतपत्रों को अलग किया गया। इस दौरान हर चरण का रिकॉर्ड भी रखा गया, ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।
मुख्यमंत्री का बयान और आयोग का रुख
इस मुद्दे पर राज्य की मुख्यमंत्री ने भी बयान देते हुए कहा कि डाक मतपत्रों को समय पर संबंधित जिलों में भेजने के लिए उन्हें अलग करना जरूरी था। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत और सभी पक्षों की मौजूदगी में की गई। चुनाव आयोग ने भी दोहराया कि किसी भी ईवीएम या वोटिंग प्रक्रिया से छेड़छाड़ नहीं हुई है। आयोग का कहना है कि इस तरह के आरोप चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सभी काम पारदर्शिता और नियमों के अनुसार किए गए।
