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मई की शुरुआत में महंगाई का वार! आखिर क्यों एक झटके में 1000 रुपये के करीब पहुंचा गैस सिलेंडर? जानिए लेटेस्ट रेट

मई 2026 की शुरुआत में LPG सिलेंडर की कीमतों में बड़ा बदलाव, 19 किलो कमर्शियल गैस सिलेंडर 993 रुपये महंगा हुआ। जानिए नए रेट, वजह और इसका आम लोगों पर असर।

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LPG Cylinder Price: मई महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए राहत और व्यापारियों के लिए झटका लेकर आई है। 1 मई से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में एक साथ 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि, घरेलू उपयोग में आने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों को फिलहाल राहत मिली है। लेकिन होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों के लिए यह बढ़ोतरी सीधा असर डालने वाली है।

लगातार तीसरी बार बढ़े दाम

गौर करने वाली बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। इससे पहले 7 मार्च को 144 रुपये और 1 अप्रैल को 200 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। अब तीसरी बार इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने बाजार में हलचल मचा दी है। लगातार बढ़ते दामों से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की चीजों और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

घरेलू उपभोक्ताओं को राहत

जहां एक तरफ कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ है, वहीं घरेलू सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। देश के बड़े शहरों में 14.2 किलो सिलेंडर के दाम स्थिर हैं—दिल्ली में 913 रुपये, मुंबई में 912.50 रुपये, चेन्नई में 928.50 रुपये और कोलकाता में 939 रुपये। सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए घरेलू कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो भविष्य में घरेलू सिलेंडर भी महंगा हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव बना कीमतों का बड़ा कारण

गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अहम भूमिका निभा रही हैं। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चित स्थिति ने तेल और गैस की सप्लाई को प्रभावित किया है। भारत अपनी LPG जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें ज्यादातर सप्लाई सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से आती है। ऐसे में सप्लाई चेन प्रभावित होने से तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि भारत ने रूस जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाकर कुछ हद तक स्थिति संभाली है, लेकिन कमर्शियल सेक्टर में गैस की कमी और कीमतों में उछाल साफ देखा जा रहा है।

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