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दशहरी आम का नाम आखिर पड़ा कैसे? लखनऊ के इस छोटे से गांव से जुड़ी है इसकी मीठी कहानी

दशहरी आम का नाम कैसे पड़ा? जानिए लखनऊ के पास एक गांव से जुड़ी इसकी दिलचस्प कहानी, खासियत और क्यों है इसकी इतनी ज्यादा डिमांड।

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गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में एक खास खुशबू फैल जाती है, जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है—यह खुशबू होती है दशहरी आम की। उत्तर भारत में इसे स्वाद का सुल्तान कहा जाता है और इसका इंतजार लोग पूरे साल करते हैं। इसकी मिठास, मुलायम गूदा और अनोखी खुशबू इसे बाकी आमों से अलग बनाती है। दशहरी का पहला टुकड़ा मुंह में जाते ही शहद जैसी मिठास घुल जाती है, जो लंबे समय तक याद रहती है। यही वजह है कि यह सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि लोगों के लिए बचपन की यादों और गर्मियों की खुशियों से जुड़ा एक खास अनुभव बन चुका है।

नाम के पीछे छिपी दिलचस्प कहानी

दशहरी आम का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर इसका नाम ‘दशहरी’ क्यों रखा गया। इसकी कहानी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पास स्थित एक छोटे से गांव दशहरी से जुड़ी है। माना जाता है कि करीब 200 साल पहले इसी गांव में इस खास किस्म के आम की पहली बार खेती की गई थी। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और गांव के नाम पर ही इस आम का नाम ‘दशहरी’ पड़ गया। आज यह आम न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना चुका है।

स्वाद, बनावट और पहचान की खासियत

दशहरी आम की सबसे बड़ी पहचान इसका रेशारहित और मुलायम गूदा है। यह आम हल्का लंबा और एक तरफ से थोड़ा मुड़ा हुआ होता है, जिसका निचला हिस्सा तोते की चोंच जैसा दिखता है। इसका छिलका पतला होता है और पकने पर हल्का पीला रंग ले लेता है। अंदर से इसका गूदा गहरा पीला और बेहद नरम होता है, जो आसानी से कट जाता है। इसकी खुशबू इतनी तेज होती है कि दूर से ही पहचान में आ जाती है। स्वाद की बात करें तो इसमें हल्की भी खटास नहीं होती, बल्कि शुद्ध मिठास का अनुभव मिलता है। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग हर साल बहुत ज्यादा रहती है।

क्यों है देश-विदेश में इतनी डिमांड?

दशहरी आम की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसका बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता है। यह आम जल्दी खराब नहीं होता, जिससे इसे दूर-दराज के इलाकों और विदेशों तक आसानी से भेजा जा सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश के मालिहाबाद और आसपास के क्षेत्र इसके उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां की मिट्टी और मौसम इस आम के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। आज दशहरी आम न सिर्फ एक फल है, बल्कि भारतीय परंपरा और स्वाद का प्रतीक बन चुका है। अगर आपने अभी तक इसका स्वाद नहीं चखा है, तो इस गर्मी इसे जरूर आजमाएं—क्योंकि यह सिर्फ आम नहीं, एक मीठा अनुभव है।

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