मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध बागेश्वर धाम सोमवार शाम एक विशेष और चर्चित आध्यात्मिक मुलाकात का केंद्र बन गया, जब भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई अपने परिवार के साथ धाम पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी तेजस्वनी गवई और पुत्र ज्योतिरादित्य गवई भी मौजूद थे। यहां पहुंचकर पूरे परिवार ने बागेश्वर बालाजी भगवान के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देश, समाज और विश्व की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। धाम परिसर में इस दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला और श्रद्धालुओं में भी उत्साह नजर आया।
धीरेंद्र शास्त्री से हुई अहम मुलाकात
दर्शन के बाद पूर्व CJI बी.आर. गवई ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से विशेष मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच करीब आधे घंटे से अधिक समय तक धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने उन्हें बागेश्वर बालाजी का पावन चित्र भेंट किया। इस भेंट और संवाद को धाम में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और सामाजिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान दोनों पक्षों ने समाज में सकारात्मक बदलाव और सेवा कार्यों की भूमिका पर भी विचार साझा किए।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई जी एवं उनकी धर्मपत्नी तेजस्वनी गवई जी ने पावन बालाजी सरकार के दर्शन कर पूज्य सरकार से आशीर्वाद प्राप्त किया।जब न्याय, कर्तव्य और श्रद्धा एक साथ जुड़ते हैं, तब समाज को नई दिशा मिलती है। पूज्य सरकार का आशीर्वाद पूरे… pic.twitter.com/NSY6MfAD5L
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) April 21, 2026
कैंसर अस्पताल और गुरुकुल का निरीक्षण
पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने बागेश्वर धाम में चल रहे कैंसर अस्पताल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं की जानकारी ली और इस प्रयास को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया। इसके साथ ही उन्होंने सनातन गुरुकुल का भी दौरा किया, जहां बच्चों को संस्कृत और पारंपरिक शिक्षा दी जा रही है। बच्चों से बातचीत के दौरान गवई ने उनके उत्साह की सराहना की और कहा कि भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सनातन संस्कृति और भविष्य का संदेश
इस पूरे दौरे के दौरान बी.आर. गवई ने बागेश्वर धाम में चल रहे सामाजिक कार्यों की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में इसी तरह कार्य होते रहें, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और इन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह दौरा केवल एक आध्यात्मिक यात्रा नहीं, बल्कि समाज सेवा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाला अवसर भी बन गया।
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