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पद गया लेकिन आवाज नहीं… राज्यसभा में राघव चड्ढा का चौकाने वाला बयान, कहा- ‘मैं उस पार्टी से आता हूं जिसमें…’ 

डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद राज्यसभा में राघव चड्ढा का बयान चर्चा में। हरिवंश को दी बधाई, ‘खट्टा-मीठा रिश्ता’ पर कही बड़ी बात।

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राज्यसभा में हाल ही में एक दिलचस्प और सियासी संदेश से भरा घटनाक्रम देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सदन में अपनी बात रखते हुए अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के अंदर हुए बदलाव का जिक्र किया। दरअसल, उन्हें हाल ही में पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया है, जिसके बाद उनका यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा कि वह जिस पार्टी से आते हैं, उसके लीडर और डिप्टी लीडर दोनों ही उस समय सदन में मौजूद नहीं थे, लेकिन वह खुद वहां उपस्थित हैं। उनके इस बयान को कई राजनीतिक जानकार पार्टी के अंदर चल रहे समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

हरिवंश के तीसरे कार्यकाल पर दी बधाई

इस दौरान राघव चड्ढा ने राज्यसभा के उपसभापति के रूप में फिर से चुने गए हरिवंश को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि हरिवंश के साथ उनका रिश्ता ‘खट्टा-मीठा’ रहा है। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जब वह विषय से भटक जाते हैं तो उन्हें डांट मिलती है, लेकिन जब वह सटीक और विषय पर रहते हैं तो उन्हें सराहना भी मिलती है। उनके इस बयान पर सदन में हल्की मुस्कान का माहौल भी देखने को मिला। यह टिप्पणी राजनीतिक गंभीरता के बीच एक मानवीय और सहज संवाद का उदाहरण बनी।

‘खट्टा-मीठा रिश्ता’ सुधारने की कोशिश

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि वह चाहते हैं कि उनका यह ‘खट्टा-मीठा’ रिश्ता आगे चलकर पूरी तरह ‘मीठा’ बन जाए। उन्होंने उपसभापति से अनुरोध किया कि जब किसी सदस्य का बोलने का समय खत्म हो जाता है और घंटी बजती है, तो उसके बाद भी एक-दो मिनट का अतिरिक्त समय मिल जाए, ताकि वह अपनी बात को बेहतर तरीके से रख सकें। यह मांग उन्होंने हल्के अंदाज में रखी, लेकिन इसके पीछे सदन में बोलने के समय और प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर संकेत भी माना जा रहा है।

सियासी संकेत और आगे की रणनीति पर नजर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा का यह बयान केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसके जरिए उन्होंने अपनी स्थिति और भूमिका को भी स्पष्ट करने की कोशिश की है। डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद भी उनका आत्मविश्वास और सदन में सक्रियता यह दिखाती है कि वह पार्टी और संसद दोनों में अपनी भूमिका को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। फिलहाल, इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले समय में आम आदमी पार्टी के अंदरूनी समीकरणों पर भी नजर रखी जा रही है।

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