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परिजनों ने रेपिस्ट का गला घोंटकर की हत्या, निर्वस्त्र कर कुएं में फेंका शव, जमानत पर बाहर आया था आरोपी

नर्मदापुरम में दुष्कर्म आरोपी की हत्या का मामला सामने आया। पीड़िता के परिवार ने आरोपी को मारकर शव कुएं में फेंका, पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया।

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मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार ने अपनी बेटी के साथ हुए कथित दुष्कर्म के आरोपी की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय युवक विश्वास उर्फ छोटू गुर्जर की गला घोंटकर हत्या की गई और उसके शव को पहचान छिपाने के लिए निर्वस्त्र कर खेत के एक कुएं में फेंक दिया गया। इस घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई कि क्या यह न्याय था या कानून को हाथ में लेने की खतरनाक मिसाल।

जमानत पर बाहर आया था आरोपी

पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक युवक पर पहले पीड़िता के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप लगा था, जिसके चलते वह जेल में बंद था। हाल ही में उसे जमानत मिली थी, जिसके बाद वह बाहर आ गया। आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद वह पीड़िता और उसके परिवार को लगातार धमका रहा था। इससे परेशान होकर परिवार ने बदला लेने की योजना बनाई। बताया जा रहा है कि 12 अप्रैल की रात परिजन आरोपी के घर पहुंचे और शादी का झांसा देकर उसे अपने साथ ले गए। इसके बाद उसे सुनसान इलाके में ले जाकर बेरहमी से पीटा गया और अंत में गला घोंटकर हत्या कर दी गई।

हत्या के बाद मंदिर में छिपे रहे आरोपी

हत्या के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए शव को कुएं में फेंक दिया और खुद फरार हो गए। बताया जाता है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए सभी आरोपी रायसेन जिले के एक मंदिर में जाकर छिप गए और तीन दिनों तक वहीं रहे। इस बीच मृतक के भाई ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस सक्रिय हुई। जांच के दौरान जब पुलिस पीड़िता के घर पहुंची तो वहां के पुरुष सदस्य गायब मिले, जिससे शक गहराया। तकनीकी जांच और मुखबिरों की मदद से पुलिस ने 15 अप्रैल को चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनकी निशानदेही पर कुएं से शव बरामद किया गया।

पुलिस की कार्रवाई जारी

इस मामले में पुलिस ने पीड़िता के पिता, भाई और जीजा समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में लेना सही है। जहां एक ओर परिवार का दर्द समझा जा सकता है, वहीं दूसरी ओर यह भी जरूरी है कि न्याय की प्रक्रिया कानून के दायरे में ही हो। इस घटना ने समाज और कानून व्यवस्था दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

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