फारस और ओमान की खाड़ी में स्थित होर्मुज स्ट्रेट को ईरान ने बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस बाजार में हलचल मची हुई है। इस बीच, ईरान ने भारत की कूटनीतिक पहल की खुलकर तारीफ की है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि भारत इस जंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने एएनआई को बताया, “इंडियन डिप्लोमेसी बहुत अच्छी है और भारत इस मुद्दे में ज्यादा बड़ी भूमिका निभा सकता है।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मंगलवार शाम तक अल्टीमेटम दिया है। भारत ने लगातार अपने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्र में तनाव कम करने और ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
ईरानी राजदूतों की प्रतिक्रिया
हाल ही में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भी भारत की विदेश नीति की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, “भारत निश्चित रूप से तनाव कम करने में प्रभावी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत की संतुलित और समझदार विदेश नीति इसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में महत्वपूर्ण मध्यस्थ बनाती है।
इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने रविवार देर रात अपने समकक्ष एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल के हमले औद्योगिक ढांचों, फैक्ट्रियों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को निशाना बना रहे हैं। अराघची ने कहा कि ईरान अपनी जनता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
होर्मुज बंद होने के वैश्विक असर
होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मार्ग उसके मित्र देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका और इजरायल के जहाजों को नहीं जाने दिया जाएगा। इससे तेल और गैस की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
भारत का पश्चिम एशिया में तेल और गैस खरीद का प्रमुख स्रोत रहा है। भारतीय कूटनीति ने इस तनावपूर्ण स्थिति में ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय प्रयास किए हैं। यदि यह नाकेबंदी जारी रहती है, तो भारत और अन्य देशों के लिए ईंधन और उर्वरक की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
भारत की भूमिका और भविष्य की रणनीति
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया के संकट में संतुलित कूटनीति अपनाई है। यह पहल न केवल वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और युद्ध के जोखिम को कम करने में भी मदद करती है। भारत की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत का मार्ग आसान हो सकता है और संघर्ष को कम किया जा सकता है।
ईरान की तारीफ और उसकी आशा इस बात की ओर संकेत करती है कि भारत का शांत और प्रभावी कूटनीतिक दृष्टिकोण अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की सक्रिय भूमिका इस समय निर्णायक साबित हो सकती है, जिससे केवल अपने ऊर्जा हित ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को भी मजबूती मिल सकती है।
