उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से सामने आई यह घटना हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है। 22 वर्षीय शावेज, जो पेशे से वेल्डिंग का काम करता था, अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के सपने के साथ रूस गया था। घरवालों को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने से उनके दिन बदल जाएंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह फैसला उनके बेटे की जिंदगी पर भारी पड़ जाएगा। करीब 9 महीने पहले वह एक एजेंट के जरिए रूस पहुंचा, जहां शुरुआत में उसने स्टील फर्नीचर से जुड़ा काम किया। परिवार के साथ उसकी बातचीत भी होती रही और सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही समय बाद हालात अचानक बदल गए। जो बेटा घर का सहारा बनने गया था, वही अब ताबूत में लौटकर आया।
अच्छी सैलरी का लालच
परिवार ने आरोप लगाया है कि शावेज को बेहतर सैलरी और स्थायी नौकरी का झांसा देकर रूस ले जाया गया था। शुरुआत में उसे एक सामान्य काम दिया गया, लेकिन दो महीने के भीतर ही उसे जबरन युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। परिजनों के मुताबिक, शावेज ने फोन और ऑडियो मैसेज के जरिए बताया था कि वह इस स्थिति में फंस गया है और वापस आना चाहता है, लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं है। उसने यह भी कहा था कि उसे सेना के साथ भेजा जा रहा है, जो उसके लिए बेहद खतरनाक है। इसके बाद परिवार के साथ उसकी बातचीत अचानक बंद हो गई। कुछ दिनों तक उम्मीद रही कि वह सुरक्षित होगा, लेकिन धीरे-धीरे यह चिंता गहरे डर में बदल गई।
7 महीने बाद मौत की खबर
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शावेज की मौत की जानकारी उसके परिवार को करीब 7 महीने बाद मिली। परिजनों के अनुसार, उन्हें हाल ही में एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि शावेज की मौत युद्ध के दौरान गोली लगने से हो गई थी। बताया गया कि उसकी मौत 12 सितंबर को ही हो गई थी, लेकिन किसी कारणवश यह सूचना परिवार तक समय पर नहीं पहुंची। इस खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। जब उसका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और फिर रामपुर पहुंचा, तो गांव में शोक की लहर दौड़ गई। माता-पिता और परिजन सदमे में हैं और लगातार रो रहे हैं। गांव के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया और इसे एक बड़ी लापरवाही और साजिश करार दिया।
कार्रवाई की मांग और एजेंटों के जाल पर उठे सवाल
इस घटना के बाद परिवार ने सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे एजेंटों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो युवाओं को झूठे वादों के जरिए विदेश भेजते हैं और उन्हें खतरनाक परिस्थितियों में धकेल देते हैं। शावेज की मां ने बताया कि उनका बेटा शुरू में वीडियो कॉल करता था और सब ठीक लग रहा था, लेकिन बाद में किसी ने उसे बहका दिया और बड़ी सैलरी का लालच दिया गया। अब परिवार को सिर्फ यह मलाल है कि अगर समय रहते मदद मिल जाती, तो शायद उनका बेटा आज जिंदा होता। यह मामला न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए चेतावनी भी है, जो बिना पूरी जानकारी के विदेश जाने का फैसला कर लेते हैं। सरकार और प्रशासन के लिए भी यह एक गंभीर मुद्दा बन गया है, जिस पर जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
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