राज्यसभा से रिटायर हुई शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। यह मुलाकात उनके राज्यसभा कार्यकाल के अंतिम दिन के तुरंत बाद हुई। प्रियंका ने सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए आभारी हैं। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने विपक्ष की भूमिका और देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत बनाए रखने पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विपक्ष में मुखर भूमिका की पुष्टि
प्रियंका चतुर्वेदी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। उन्होंने इस अवसर की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया। साथ ही प्रियंका ने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में भी विपक्ष की मुखर सदस्य बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि देश को एक मजबूत और सक्रिय विपक्ष की जरूरत है, और वे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेंगी। इस मुलाकात ने उनके राजनीतिक रुख को स्पष्ट किया कि रिटायर होने के बाद भी वे राजनीतिक संवाद और रणनीति में सक्रिय रहेंगी।
सुनेत्रा पवार से हुई दोस्ताना और राजनीतिक चर्चा
राज्यसभा में अपने अंतिम दिन प्रियंका चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार से भी मुलाकात की। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि यह देखकर खुशी हुई कि व्यक्तिगत क्षति के बावजूद सुनेत्रा पवार अपनी पार्टी और राज्य की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। प्रियंका ने उपमुख्यमंत्री के सक्रिय योगदान की सराहना की और उन्हें भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दी। इस मुलाकात ने स्पष्ट किया कि प्रियंका राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीतिक गतिविधियों में लगातार संपर्क बनाए रखना चाहती हैं।
Expressed my gratitude to Hon. President @INCIndia and Rajya Sabha LoP Shri Mallikarjun Kharge ji, for his support and his encouragement always🙏🏼 pic.twitter.com/k57xR22Xqt
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 3, 2026
प्रियंका की सक्रिय विपक्षी भूमिका के संकेत
प्रियंका चतुर्वेदी की कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री से हुई मुलाकात ने उनके राजनीतिक रुख को स्पष्ट किया। विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्यसभा से रिटायर होने के बाद भी उनका राजनीतिक प्रभाव और विपक्ष में सक्रिय भूमिका बरकरार रहेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रियंका नई रणनीतियों और राजनीतिक संवाद के जरिए विपक्ष को सशक्त बनाने का प्रयास करेंगी। उनके कदम राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावनाओं को भी उजागर कर रहे हैं। यह मुलाकात विपक्ष और शिवसेना (यूबीटी) के भविष्य की दिशा को लेकर कई सवाल भी खड़े करती है।
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