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‘जनता ही क्यों झेले हर मार?’ पीएम मोदी के ‘संकट’ वाले बयान पर केजरीवाल का तीखा पलटवार, छिड़ी नई सियासी जंग!

मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी के लोकसभा में दिए बयान के बाद अरविंद केजरीवाल ने साधा निशाना। शेयर बाजार, एलपीजी और अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार की तैयारियों पर उठाए गंभीर सवाल।

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देश की राजनीति में एक बार फिर वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया है, और इस बार मुद्दा घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भीषण संघर्ष के साये में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देशवासियों को संबोधित करते हुए आने वाले कठिन समय के लिए तैयार रहने को कहा था। पीएम मोदी के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर मोर्चा खोल दिया। केजरीवाल ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार की दूरदर्शिता और तैयारियों पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि आखिर हर सरकारी नाकामी का बोझ आम आदमी की जेब और उसकी जिंदगी पर ही क्यों डाल दिया जाता है?

पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन

संसद के सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता पर चिंता व्यक्त की। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस संघर्ष का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है और यह एक ‘अप्रत्याशित संकट’ है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि जिस तरह भारत ने एकजुट होकर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का डटकर सामना किया था, उसी तरह इस आर्थिक और रणनीतिक चुनौती के लिए भी तैयार रहना होगा। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत कूटनीति और संवाद के जरिए तनाव कम करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर घरेलू स्तर पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों के कारण आज देश इस संकट को झेलने की स्थिति में है।

केजरीवाल का तीखा प्रहार

प्रधानमंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए अरविंद केजरीवाल ने सरकार की विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दुनिया को महीनों पहले से पता था कि युद्ध के हालात बन रहे हैं, फिर मोदी सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए? उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “शेयर बाजार गोते खा रहा है, रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है और एलपीजी की कमी की वजह से कई छोटे कारोबार दम तोड़ रहे हैं। भीषण गर्मी में लोग सिलेंडरों के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।” आप नेता ने सवाल उठाया कि जब संकट सामने दिख रहा था, तो सरकार ने आपूर्ति (Supply Chain) सुनिश्चित करने के लिए पहले से कदम क्यों नहीं उठाए?

‘आम आदमी ही क्यों चुकाए कीमत?’

केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया में प्रवासी मजदूरों और मध्यम वर्ग की दुर्दशा का जिक्र करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि युद्ध मिडिल ईस्ट में हो रहा है, लेकिन उसका खामियाजा भारत का आम आदमी भुगत रहा है। प्रवासी मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। केजरीवाल ने सरकार से पूछा कि हर संकट का बोझ आखिर लोगों पर ही क्यों डाला जाता है? उन्होंने इसे सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि आम आदमी अपनी मेहनत की कमाई से टैक्स भरता है, लेकिन जब मुसीबत आती है, तो उसे ही ‘तैयार रहने’ की नसीहत दी जाती है। केजरीवाल के इस बयान ने अब एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई सरकार अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार थी या नहीं।

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