उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में नए नियमों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने हाल ही में एक नई व्यवस्था लागू करने की बात कही है, जिसके तहत गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अपनी आस्था का हलफनामा देना होगा। इस फैसले के सामने आने के बाद से ही देशभर में इस पर बहस छिड़ गई है। मामला तब और चर्चा में आया जब अभिनेत्री सारा अली खान का नाम इससे जुड़ा। बताया गया कि उन्हें भी मंदिर में पूजा के लिए इस प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है।
कंगना रनौत का बयान बना चर्चा का केंद्र
इस पूरे विवाद पर बीजेपी सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “सब सनातनी हैं और सत्य लिखने में किसी को घबराना नहीं चाहिए।” कंगना के अनुसार, सनातन धर्म सबसे पुराना और सार्वभौमिक है, इसलिए किसी को अपनी आस्था जाहिर करने में डर नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग इसे समर्थन दे रहे हैं, तो कुछ इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
क्या है मंदिर समिति का पूरा नियम?
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी गैर-हिंदू श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होगा। 17 मार्च को जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया कि मंदिर में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं को एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमें वे अपनी आस्था के बारे में जानकारी देंगे। समिति का कहना है कि यह कदम मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए उठाया गया है। खास बात यह है कि यह नियम आम लोगों के साथ-साथ वीआईपी और सेलिब्रिटी पर भी समान रूप से लागू होगा।
समाज और राजनीति में उठे सवाल
इस फैसले ने धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच एक नई बहस खड़ी कर दी है। कुछ लोग इसे परंपराओं की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे भेदभावपूर्ण मान रहे हैं। वहीं, सारा अली खान जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्व का नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। अब देखना होगा कि यह नियम भविष्य में किस तरह लागू होता है और इस पर सरकार या न्यायालय की क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, यह मुद्दा देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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