इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने मंगलवार, 17 मार्च 2026 को ईरान के नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारिजानी (Ali Larijani) और बासिज बल के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी को निशाना बनाने का दावा किया। इस हमले की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और राजनीतिक हलचल मच गई। IDF ने गुलाम रजा सुलेमानी की मौत की पुष्टि कर दी है, जबकि अली लारिजानी (Ali Larijani) के हताहत होने की पुष्टि अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है। इजरायल के रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि इस हमले में लारिजानी की मौत हो गई, लेकिन उनके कार्यालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि थोड़ी देर में लारिजानी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए स्थिति स्पष्ट करेंगे। इस हमले के बाद ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। लारिजानी अयातुल्ला अली खामेनेई के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते थे और उनकी मौत या चोट से ईरान की सुरक्षा प्रणाली में भारी असर पड़ सकता है।
Ali Larijani: ईरान का ताकतवर चेहरा
अली लारिजानी (Ali Larijani) को ईरान की सत्ता के शीर्ष व्यक्ति और खामेनेई के बेहद करीबी सहयोगी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कई वर्षों तक ईरान की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा नीतियों में निर्णायक भूमिका निभाई। ट्रंप प्रशासन के समय भी उन्होंने अमेरिकी नीतियों की कड़ी आलोचना की थी।
ईरान के सरकारी मीडिया ने लारिजानी (Ali Larijani) के हवाले से बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान विरोधी प्रदर्शनों को एआई या फेक बताने की कोशिश की। उनके अनुसार, यह हमला केवल ईरान को कमजोर करने और देश की आंतरिक सुरक्षा में दरार डालने के लिए किया गया।
मुस्लिम देशों से असंतोष और वैश्विक निंदा
लारिजानी (Ali Larijani) ने हमले से पहले मुस्लिम बहुल देशों से समर्थन की कमी पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर वार्ता के दौरान धोखे से हमला किया, जिसमें कई नागरिक, कमांडर और इरानी सैन्य अधिकारी शहीद हुए। यह हमला रमजान के पवित्र महीने में हुआ, जिसने पूरी मुस्लिम दुनिया में चिंता और नाराजगी बढ़ा दी है। इस हमले के बाद, ईरानी मीडिया और सोशल मीडिया पर अली लारिजानी के समर्थक और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इस हमले से ईरान-इजरायल तनाव में न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सैन्य रूप से भी वृद्धि होने की संभावना है।
IDF और अमेरिका का बयान, वैश्विक सुरक्षा पर असर
IDF ने बयान जारी करते हुए कहा कि हमला “सटीक और रणनीतिक” था, जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य कमांड संरचना को कमजोर करना था। अमेरिकी अधिकारी भी इस हमले की पुष्टि कर चुके हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने तक सीमित थी। अगर अली लारिजानी इस हमले में मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए, तो ईरान की सुरक्षा और नीति निर्माण प्रणाली में बड़े बदलाव हो सकते हैं। दुनिया के कई देश इस घटना को नजदीकी से देख रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर भी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।
