West Bengal में विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखों के ऐलान के तुरंत बाद Election Commission of India ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव कर दिया है। आयोग ने राज्य के कई शीर्ष अधिकारियों को उनके पद से हटाकर नई नियुक्तियों का आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर जैसे अहम पदों पर बैठे अधिकारियों को बदल दिया गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए ऐसे फैसले जरूरी होते हैं। हालांकि इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्तारूढ़ दल ने इस कदम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
चीफ सेक्रेटरी और होम सेक्रेटरी को हटाने से बढ़ा विवाद
चुनाव आयोग ने राज्य की चीफ सेक्रेटरी Nandini Chakravarty को उनके पद से हटाने का आदेश दिया है। उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी Dushyant Nariala को नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा राज्य के होम सेक्रेटरी Jagdish Prasad Meena को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह 1997 बैच की आईएएस अधिकारी Sanghamitra Ghosh को प्रिंसिपल सेक्रेटरी, होम एंड हिल अफेयर्स बनाया गया है। आयोग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि इन आदेशों को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए और नई नियुक्तियों की अनुपालन रिपोर्ट तय समय के भीतर भेजी जाए।
पुलिस विभाग में भी बड़े स्तर पर बदलाव
प्रशासनिक फेरबदल के साथ-साथ पुलिस विभाग में भी बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। राज्य के डीजीपी Piyush Pandey को उनके पद से हटाकर Siddh Nath Gupta को नया डीजीपी बनाया गया है। इसके अलावा कोलकाता पुलिस कमिश्नर Supratim Sarkar को भी पद से हटाकर Ajay Kumar Nand को नई जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही कई अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग दी गई है ताकि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को बेहतर तरीके से संभाला जा सके। चुनाव आयोग का कहना है कि इस तरह के बदलाव चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए किए जाते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है उन्हें चुनाव खत्म होने तक किसी भी चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
ममता बनर्जी का विरोध, सियासी बयानबाजी तेज
इस फैसले के बाद राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनाव आयोग के इस कदम का विरोध जताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इसे लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और पार्टी नेताओं से विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार रहने को कहा है। सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के प्रशासनिक बदलाव राजनीतिक दबाव में किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर Bharatiya Janata Party ने चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को तटस्थ रखना जरूरी है। इसी बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान कराने का ऐलान किया है। राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि सभी सीटों की मतगणना 4 मई 2026 को होगी। आयोग का कहना है कि इस बार चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और हिंसा मुक्त तरीके से कराने की कोशिश की जाएगी।
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