उत्तर प्रदेश में हाल ही में आयोजित UP Police Sub-Inspector Exam का एक सवाल अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। बताया जा रहा है कि सामान्य हिंदी के एक प्रश्न में दिए गए विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल किया गया था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रश्न में पूछा गया था कि “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला कौन होता है?” इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ जैसे शब्द दिए गए थे। कई लोगों का कहना है कि ऐसे प्रश्न में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में रखना अनुचित है और इससे एक वर्ग की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसी कारण यह मुद्दा तेजी से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी
जैसे ही यह सवाल सामने आया, सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने इसे गंभीर गलती बताते हुए परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी से जवाब मांगा। कुछ लोगों का कहना है कि ‘पंडित’ शब्द का संबंध भारतीय परंपरा में विद्वान या ज्ञान से जुड़े व्यक्ति से माना जाता है, ऐसे में इसे इस तरह के संदर्भ में इस्तेमाल करना गलत संदेश दे सकता है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद सावधानी से होना चाहिए, क्योंकि लाखों युवा इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। वहीं कुछ लोगों ने इस मामले में जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और टिप्पणियां सामने आई हैं, जिनमें इस सवाल को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
दारोगा भर्ती का पेपर आया और तीसरा सवाल देखकर हँसी भी आई, गुस्सा भी आया ऑप्शन में सीधे ‘पंडित’ को अपराधी बना दिया? कल को पूछेंगे – सबसे बड़ा खतरा कौन?
A) आतंकवादी
B) पंडित
C) दोनों भाई ये ब्राह्मण समाज को जानबूझकर बदनाम करने की साजिश है या फिर पेपर बनाने वाले की दिमागी हालत खराब… pic.twitter.com/xXXJtbGRIF— Durgesh Shukla (@mydurgeshshukla) March 14, 2026
राजनीतिक हलकों में भी बढ़ी चर्चा
मामला बढ़ने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक स्तर तक भी पहुंच गया। उत्तर प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने भी इस विषय पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और शब्दों का चयन बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय या समूह की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। इस बीच कई सामाजिक संगठनों ने भी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में तुरंत जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा पैदा न हो।
सीएम योगी ने दिए स्पष्ट निर्देश
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने भर्ती बोर्ड और परीक्षा से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रश्नपत्र तैयार करते समय किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय के प्रति अमर्यादित टिप्पणी से बचा जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए उनमें संतुलित और मर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाना बेहद जरूरी है। फिलहाल यह मामला जांच और चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए परीक्षा प्रणाली में और अधिक सावधानी और समीक्षा की आवश्यकता है।
