दुनिया के नक्शे पर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने भारत की रसोई का गणित बिगाड़ दिया है। युद्ध की आहट के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिसका सीधा असर भारत में एलपीजी (LPG) की सप्लाई पर पड़ा है। मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगरों में गैस की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि अब हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी एलपीजी मिडिल ईस्ट से आयात करता है, लेकिन ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में बाहर खाना खाना एक सपना बन सकता है।
सरकार का बड़ा फैसला: पहले घर, फिर व्यापार
गैस की सीमित उपलब्धता को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा कड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं (14.2 किलो सिलेंडर) की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए। इस फैसले का खामियाजा कमर्शियल 19 किलो वाले सिलेंडरों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार का तर्क है कि रेस्टोरेंट्स के पास इलेक्ट्रिक ओवन, इंडक्शन और पीएनजी (PNG) जैसे वैकल्पिक स्रोत मौजूद हैं, जबकि आम नागरिक पूरी तरह सिलेंडर पर निर्भर हैं। हालांकि, इस प्राथमिकता ने होटल मालिकों की रातों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि अचानक हुई इस कटौती ने उनके पूरे ऑपरेशन को ठप कर दिया है।
मुंबई-बेंगलुरु में चेतावनी: दो दिन में गिर सकते हैं शटर
होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ‘इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन’ (AHAR) के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने चेतावनी दी है कि मुंबई जैसे शहर में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई रविवार से लगभग बंद है। उनका कहना है कि अगर अगले 48 घंटों में सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो शहर के हजारों रेस्टोरेंट्स को मजबूरन ताला लगाना पड़ेगा। यही हाल बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य हिस्सों का भी है। रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सिर्फ घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग में ही 2 से 8 दिन की देरी नहीं हो रही, बल्कि कमर्शियल बुकिंग तो सिस्टम से गायब ही हो गई है। एसोसिएशन ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर तत्काल दखल देने की मांग की है।
जमाखोरी रोकने के लिए नए नियम और भविष्य की तैयारी
संकट की इस घड़ी में सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब एलपीजी रिफिल के लिए वेटिंग पीरियड को 15 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि पैनिक बुकिंग को रोका जा सके। इस बीच, भारत अब मिडिल ईस्ट पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों की ओर देख रहा है। नए अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स से बातचीत जारी है ताकि गैस की किल्लत को जल्द से जल्द दूर किया जा सके। तब तक के लिए इंडस्ट्री को अपने ‘प्रोडक्ट मिक्स’ को एडजस्ट करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहने की सलाह दी गई है। गुजरात के मोरबी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी टाइल और सिरेमिक भट्टियां गैस की कमी के कारण ठंडी पड़ने लगी हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
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