होली को रंगों, उमंग और आपसी भाईचारे का पर्व माना जाता है, लेकिन इस बार ब्रज की होली से जुड़ा एक वायरल वीडियो इस खुशी के उत्सव पर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो में कुछ पुरुषों द्वारा महिलाओं के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में साफ दिखता है कि कुछ महिलाएं असहज हैं, अपने चेहरे ढकने की कोशिश कर रही हैं और जबरन रंग लगाए जाने व अनचाहे स्पर्श से बचना चाहती हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच सहमति, महिलाओं की सुरक्षा और त्योहारों की मर्यादा को लेकर बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स का कहना है कि परंपरा और संस्कृति के नाम पर किसी की निजी सीमा का उल्लंघन किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं हो सकता। ब्रज क्षेत्र में मनाई जाने वाली होली अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जानी जाती है, लेकिन वायरल वीडियो ने इस बात पर ध्यान खींचा है कि कहीं उत्सव की आड़ में गलत मानसिकता को बढ़ावा तो नहीं मिल रहा।
‘होली है’ कहकर हर हद पार?
वीडियो में दिख रही तस्वीरों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या ‘बुरा न मानो, होली है’ जैसे जुमले को बिना सहमति किसी को छूने का लाइसेंस समझ लिया गया है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने नाराजगी जताते हुए लिखा कि रंग लगाना खुशी की अभिव्यक्ति है, न कि किसी पर जबरदस्ती अधिकार जताने का तरीका। कुछ महिलाओं को वीडियो में दुपट्टे से खुद को ढकते हुए देखा गया, जिससे यह साफ झलकता है कि वे स्थिति में सहज नहीं थीं। लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति असहज महसूस कर रहा है, तो उसे सम्मान देना ही असली संस्कृति है। बहस का केंद्र यह भी रहा कि समस्या त्योहार में नहीं, बल्कि उन लोगों की सोच में है जो उत्सव का गलत फायदा उठाते हैं। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि यदि ऐसे व्यवहार को “परंपरा” बताकर नजरअंदाज किया गया, तो यह महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरनाक संकेत है।
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पहले भी उठ चुकी है आवाज
यह पहली बार नहीं है जब ब्रज की होली को लेकर इस तरह का विवाद सामने आया हो। पिछले साल बरसाना की होली से जुड़े कुछ वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने भी इसी तरह की बहस को जन्म दिया था। तब भी कुछ महिलाओं ने सार्वजनिक मंचों पर यह सवाल उठाया था कि क्या उत्सव के दौरान उनकी सहमति मायने नहीं रखती। हालांकि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक ब्रज पहुंचते हैं और अधिकतर लोग परंपराओं का सम्मान करते हुए उत्सव मनाते हैं, लेकिन कुछ घटनाएं पूरे आयोजन की छवि पर असर डाल देती हैं। जानकारों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है, ताकि भविष्य में उत्सव को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया जा सके। सोशल मीडिया पर यह मांग भी उठ रही है कि स्थानीय प्रशासन और आयोजन से जुड़े लोग सुरक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता दें।
समाधान क्या है?
पूरा विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि किसी भी उत्सव की असली खूबसूरती आपसी सम्मान और सहमति में ही है। होली का अर्थ केवल रंग उड़ाना नहीं, बल्कि खुशी बांटना और रिश्तों में मिठास घोलना है। अगर कोई उत्सव किसी को डर, असहजता या अपमान का एहसास कराए, तो उस पर खुलकर बात होना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक जागरूकता, स्पष्ट नियम और जिम्मेदार व्यवहार ही इसका समाधान है। लोगों को यह समझना होगा कि परंपरा का मतलब किसी की आज़ादी छीनना नहीं होता। वायरल वीडियो ने भले ही विवाद खड़ा किया हो, लेकिन यह एक मौका भी है—सोच बदलने का, सीमाएं समझने का और यह तय करने का कि आने वाले समय में होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि सम्मान की भी मिसाल बने।
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