केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजकोषीय घाटे यानी फिस्कल डेफिसिट को लेकर एक अहम घोषणा की है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में फिस्कल डेफिसिट को घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि वह धीरे-धीरे खर्च और कमाई के बीच संतुलन बनाकर देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है। वित्त मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने पहले ही वादा किया था कि 2022 के बाद राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाया जाएगा, और अब उसी दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में फिस्कल डेफिसिट 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसे अगले साल और कम किया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार अब अनियंत्रित खर्च से बचते हुए वित्तीय अनुशासन पर ज्यादा ध्यान दे रही है, ताकि देश पर कर्ज का बोझ न बढ़े और भविष्य सुरक्षित रहे।
घाटा कम होने से आम लोगों को कैसे होगा फायदा
फिस्कल डेफिसिट कम करने का सीधा मतलब यह होता है कि सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा। जब सरकार कम उधार लेती है, तो ब्याज का दबाव भी घटता है। इसका असर सिर्फ सरकारी खातों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोगों और कंपनियों तक भी पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कम राजकोषीय घाटे से ब्याज दरों में स्थिरता आती है, जिससे होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन जैसे कर्ज थोड़े सस्ते हो सकते हैं। इसके अलावा, जब सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखती है, तो महंगाई को काबू में रखना भी आसान होता है। बजट 2026 में सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह बिना जरूरत खर्च नहीं करेगी और हर रुपये का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाएगा। इससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है और देश की आर्थिक छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है। कुल मिलाकर, घाटा कम करने की यह नीति लंबे समय में आम नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
पूंजीगत खर्च बढ़ाकर विकास को दी जाएगी रफ्तार
Budget 2026 में जहां एक तरफ घाटा घटाने की बात की गई है, वहीं दूसरी तरफ विकास को तेज करने के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने का भी ऐलान हुआ है। वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत व्यय का लक्ष्य बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो मौजूदा साल में 11.2 लाख करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि सरकार सड़कों, रेलवे, पुलों, हवाई अड्डों, बिजली और शहरी विकास जैसी योजनाओं पर ज्यादा पैसा खर्च करेगी। सरकार का मानना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ने से रोजगार के नए मौके बनते हैं और अर्थव्यवस्था में पैसे का प्रवाह बढ़ता है। खास बात यह है कि इस बार छोटे और मझोले शहरों पर भी खास ध्यान देने की बात कही गई है, ताकि विकास सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे। जब गांवों और कस्बों में सड़क, बिजली और अन्य सुविधाएं बेहतर होंगी, तो वहां भी कारोबार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे देश की आर्थिक गति तेज होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ाने की नई योजना
बजट 2026 में सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए रिस्क गारंटी फंड बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद निजी कंपनियों को बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है। कई बार लंबी अवधि की परियोजनाओं में जोखिम ज्यादा होता है, जिससे निजी निवेशक पीछे हट जाते हैं। रिस्क गारंटी फंड से यह जोखिम कुछ हद तक कम होगा और कंपनियां बिना ज्यादा डर के निवेश कर सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलेगा और विकास कार्य तेजी से पूरे होंगे। कुल मिलाकर Budget 2026 यह साफ करता है कि सरकार एक तरफ खर्च पर नियंत्रण रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ विकास की रफ्तार भी कम नहीं होने देना चाहती। फिस्कल डेफिसिट घटाने और पूंजीगत खर्च बढ़ाने का यह संतुलन आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
