दिल्ली पुलिस की SWAT कमांडो काजल चौधरी की हत्या का मामला पूरे देश को झकझोर देने वाला है। यह कोई सामान्य घरेलू हिंसा की घटना नहीं थी, बल्कि ऐसा अपराध था, जिसका गवाह खुद पीड़िता का भाई बना। 22 जनवरी की शाम काजल अपने मोहन गार्डन स्थित घर पर थी। उसी दौरान उसका पति अंकुर, जो रक्षा मंत्रालय में क्लर्क के पद पर तैनात है, गुस्से में आ गया। काजल ने अपने भाई निखिल से फोन पर बात की और पहली बार खुलकर अपनी परेशानी बताने लगी। बातचीत के दौरान माहौल अचानक बदल गया। अंकुर ने काजल के हाथ से फोन छीन लिया और निखिल से कहा—“इस कॉल को रिकॉर्ड कर लो, ये पुलिस के काम आएगी।” इसके बाद जो शब्द उसने बोले, वे किसी भी इंसान की रूह कंपा देने वाले थे—“मैं तुम्हारी बहन को मार रहा हूं, पुलिस मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।” इसके बाद फोन पर काजल की चीखें गूंजने लगीं। कुछ ही पलों में कॉल कट गई, और एक भाई बेबस होकर अपनी गर्भवती बहन की आख़िरी आवाज़ें सुनता रह गया।
डंबल से हमला, पांच दिन मौत से संघर्ष
फोन कटने के करीब पांच मिनट बाद निखिल के मोबाइल पर फिर कॉल आया। इस बार अंकुर ने बेहद ठंडे लहजे में कहा—“वह मर गई है, अस्पताल आ जाओ।” जब निखिल पुलिस के साथ मौके पर पहुंचा, तो अंकुर और उसके परिवार के लोग पहले से वहां मौजूद थे। घर के अंदर का मंजर देखकर निखिल सन्न रह गया। काजल का सिर बुरी तरह कुचला हुआ था, शरीर पर जगह-जगह गहरी चोटों के निशान थे। बाद में पता चला कि अंकुर ने भारी डंबल से उसके सिर पर कई वार किए थे। काजल उस समय चार महीने की गर्भवती थी। हालत गंभीर होने के कारण पहले दिल्ली के कई अस्पतालों में भर्ती कराने की कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों ने बचने की संभावना बेहद कम बताई। आखिरकार उसे गाजियाबाद के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने पांच दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। 27 जनवरी की सुबह उसने दम तोड़ दिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने अंकुर को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सवाल यह है कि क्या एक कॉल रिकॉर्डिंग ही किसी की जान बचाने के लिए काफी होती है?
दहेज, टॉर्चर और चुप्पी की मजबूरी
निखिल, जो खुद संसद मार्ग थाने में तैनात है, ने बताया कि दिल्ली पुलिस की SWAT कमांडो काजल लंबे समय से घरेलू हिंसा का शिकार थी। शादी को करीब डेढ़ साल हुए थे और उनका एक डेढ़ साल का बेटा है, जो फिलहाल नाना-नानी के पास है। निखिल के मुताबिक, करीब पांच महीने पहले भी अंकुर ने काजल को थप्पड़ मारा था। उस वक्त निखिल मौके पर पहुंचा और अपनी बहन से अपने साथ चलने को कहा, लेकिन अंकुर ने माफी मांग ली और अपने बच्चे की कसम खाकर भरोसा दिलाया कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगा। काजल ड्यूटी के साथ-साथ गर्भावस्था में भी घर के सारे काम करने को मजबूर थी। वह ज्यादा शिकायत नहीं करती थी, शायद इसलिए कि वह एक पुलिसकर्मी थी और समाज में ‘मजबूत महिला’ की छवि से बंधी हुई थी। निखिल का आरोप है कि अंकुर और उसके रिश्तेदार दहेज को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे। सवाल यह भी उठता है कि जब एक महिला पुलिसकर्मी ही अपने घर में सुरक्षित नहीं थी, तो आम महिलाओं की स्थिति क्या होगी?
कानून, सवाल और समाज की जिम्मेदारी
दिल्ली पुलिस की SWAT कमांडो काजल चौधरी की हत्या केवल एक व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज और सिस्टम दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ओर आरोपी पति यह दावा करता रहा कि पुलिस उसका कुछ नहीं कर पाएगी, दूसरी ओर एक भाई कॉल रिकॉर्डिंग के सहारे बहन की जान बचाने की कोशिश करता रहा। यह मामला दिखाता है कि घरेलू हिंसा कितनी खतरनाक रूप ले सकती है और समय रहते अगर सख्त कदम न उठाए जाएं तो नतीजा कितना भयावह हो सकता है। काजल जैसी प्रशिक्षित SWAT कमांडो, जो देश की सुरक्षा के लिए तैनात थी, वह अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रही। अब पुलिस ने हत्या, दहेज उत्पीड़न और गर्भवती महिला पर हमला जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। काजल का बेटा अब मां के साए के बिना बड़ा होगा, और यह सवाल हमेशा रहेगा कि अगर उस फोन कॉल से पहले सिस्टम ने समय पर उसकी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज वह जिंदा होती।
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