Sunday, February 1, 2026
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UGC बिल के खुला समर्थन में आई नेहा सिंह राठौड़, बोली ‘जो भेदभाव करता है वो कानून का विरोध…’

UGC के नए कानून को लेकर जहां सवर्ण संगठनों का विरोध जारी है, वहीं लोकगायिका नेहा सिंह राठौर ने इसका खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाज की पुरानी बीमारी बताते हुए विरोध करने वालों पर सवाल उठाए। पढ़ें पूरी खबर।

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UGC के नए कानून को लेकर देशभर में माहौल गरमाया हुआ है। खासकर जनरल कैटेगरी से जुड़े संगठनों और सवर्ण समाज की ओर से इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं बरेली में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री द्वारा जिला मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने के बाद यह मुद्दा और सुर्खियों में आ गया। विरोध करने वालों का कहना है कि नया कानून समानता के नाम पर उनके अधिकारों को सीमित करता है। दूसरी ओर, सरकार और समर्थक वर्ग इसे शिक्षा संस्थानों में सम्मान, समानता और भेदभाव खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं। इसी बीच इस पूरे विवाद पर लोकगायिका और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहने वाली नेहा सिंह राठौर की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने बहस को नया मोड़ दे दिया है।

नेहा सिंह राठौर का वीडियो, विरोध करने वालों से सीधे सवाल

नेहा सिंह राठौर ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर करीब ढाई मिनट का वीडियो पोस्ट कर UGC के नए कानून का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि चोरी के खिलाफ कानून बनने से वही परेशान होता है जो चोर होता है, अत्याचार के खिलाफ कानून से वही नाराज होता है जो अत्याचारी होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई कानून किसी वर्ग या समूह को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है, तो उससे दिक्कत किसे हो सकती है। नेहा ने साफ कहा कि जातिगत भेदभाव और पक्षपात हमारे समाज की बहुत पुरानी बीमारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले यह सोचना चाहिए कि वे किस पक्ष में खड़े हैं—सम्मान के या भेदभाव के।

‘कड़वी दवा से ही पुरानी बीमारी ठीक होती है’

UGC के नए कानून को लेकर अपने बयान में नेहा सिंह राठौर ने उदाहरण देते हुए कहा कि समाज की पुरानी बीमारियों का इलाज हमेशा कड़वी दवाइयों से ही होता है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट भी एक समय कड़वी दवा माना गया था, जिसका जमकर विरोध हुआ, लेकिन उसका मकसद अत्याचार रोकना था। इसी तरह आरक्षण भी एक कड़वा फैसला था, लेकिन उसका उद्देश्य बराबरी लाना था। नेहा ने तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कुछ लोग इसलिए नाराज हैं क्योंकि अब वे दूसरों को अपमानित नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कुछ लोगों को यह डर सता रहा है कि उनका अवैध विशेषाधिकार छिनने वाला है। नेहा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

‘जातिगत स्वार्थ से ऊपर देशहित को रखिए’

UGC के नए कानून को लेकर नेहा सिंह राठौर ने अपने वीडियो के अंत में लोगों से सीधी अपील की कि वे जाति और बिरादरी के चश्मे से ऊपर उठकर देशहित के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि देश का संविधान बराबरी और सम्मान के अधिकार की बात करता है, लेकिन हकीकत में आज भी हर नागरिक को बराबर सम्मान नहीं मिलता। नेहा ने आरोप लगाया कि जो लोग कल तक सरकार से सवाल पूछने को देशद्रोह बताते थे, वही लोग आज एक कानून आने पर बेचैन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून देशवासियों के गौरव को बढ़ाने वाला है और इसका विरोध करना देशहित के खिलाफ है। नेहा ने यह भी कहा कि यह कोई मामूली कानून नहीं है, बल्कि लंबे समय की मेहनत और मंथन के बाद इसे तैयार किया गया है। इसलिए इसका सम्मान किया जाना चाहिए। उनके इस बयान ने UGC कानून को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गहराने के संकेत दे रहा है।

 

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