उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पुलिसकर्मियों तक को असहज और भावुक कर दिया। थाने पहुंचे करीब 60 वर्षीय बुजुर्ग आस मोहम्मद किसी अपराध की शिकायत लेकर नहीं आए थे, बल्कि उनके दिल में जमा वर्षों की पीड़ा उन्हें यहां खींच लाई थी। बुजुर्ग ने पुलिस को बताया कि जिस दुकान और मालिक के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा खपा दिया, उसी मालिक ने बेटे की शादी जैसे खास मौके पर उन्हें याद तक नहीं किया। न सगाई में बुलावा आया, न शादी में। जब बाद में किसी और से उन्हें शादी की खबर मिली, तो यह बात उन्हें भीतर तक तोड़ गई। पुलिसकर्मियों ने जब यह सुना, तो थाने में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, क्योंकि यह मामला कानून से ज्यादा इंसानियत और रिश्तों से जुड़ा था।
तीन दशक की नौकरी, सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, परिवार का हिस्सा
आस मोहम्मद दनकौर कस्बे के शोक बाजार इलाके में स्थित एक बर्तन की थोक दुकान पर पिछले करीब 30 वर्षों से काम कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी जवानी से लेकर बुजुर्गावस्था तक का सफर उसी दुकान में गुजारा है। सुबह दुकान खोलना, सामान जमाना, ग्राहकों से बात करना और रात में दुकान बंद करना—यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहा। बुजुर्ग का कहना है कि इस दौरान उनका रिश्ता मालिक से सिर्फ मालिक-कर्मचारी का नहीं रहा, बल्कि परिवार जैसा बन गया था। वे मालिक के सुख-दुख में शामिल रहे, हर जिम्मेदारी को अपनी जिम्मेदारी समझकर निभाया। ऐसे में बेटे की शादी जैसे अहम मौके पर खुद को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना उन्हें गहरा आघात दे गया। उनका कहना था कि अगर बुलाया नहीं जाता, तो कम से कम एक बार बताया तो जाता कि शादी हो रही है।
“30 साल की मेहनत का यही सिला?” आहत होकर पहुंचे थाने
बुजुर्ग ने पुलिस के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए कहा कि उन्हें पैसों या किसी फायदे की उम्मीद नहीं थी, बस सम्मान और अपनापन चाहिए था। उनका कहना था कि उन्हें ऐसा लगा जैसे 30 साल की मेहनत, ईमानदारी और वफादारी की कोई कीमत ही नहीं रही। इसी भावनात्मक आघात में वे थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराने की बात कही। पुलिस ने उनकी पूरी बात ध्यान से सुनी और उन्हें समझाया कि किसी को शादी में न बुलाना कानूनन अपराध नहीं है, इसलिए इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। हालांकि पुलिस ने यह भी माना कि बुजुर्ग की भावनाएं बिल्कुल जायज हैं। कई पुलिसकर्मी खुद भी यह सोचने पर मजबूर हो गए कि समाज में रिश्तों और भरोसे का मतलब आखिर क्या रह गया है।
पुलिस की समझाइश और अनसुलझा सवाल
दनकौर थाना पुलिस ने बुजुर्ग को संवेदनशीलता के साथ समझाया और सलाह दी कि वह दुकान मालिक से सीधे बातचीत करें और अपनी भावनाएं उनके सामने रखें। पुलिस ने भरोसा दिलाया कि अगर किसी तरह की धमकी या जबरदस्ती की स्थिति बनती है, तो वे जरूर मदद करेंगे। फिलहाल इस मामले में दुकान मालिक या उसके परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यही वजह है कि सवाल अब भी बना हुआ है—आखिर ऐसी क्या मजबूरी या वजह रही कि 30 साल पुराने कर्मचारी को बेटे की शादी में नहीं बुलाया गया? यह मामला कानून की किताबों में भले ही दर्ज न हो सके, लेकिन समाज के लिए यह एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ गया है कि क्या लंबे समय तक निभाई गई वफादारी और रिश्तों की कोई अहमियत नहीं रह गई है।
