राष्ट्रपति भवन या किसी राष्ट्रीय सम्मान समारोह का मंच हमेशा अनुशासन, गरिमा और सख्त प्रोटोकॉल का प्रतीक माना जाता है। ऐसे मंच पर हर कदम पहले से तय नियमों के अनुसार उठाया जाता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी वजह से चर्चा में आ गया है। वीडियो में एक छात्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अवॉर्ड और सर्टिफिकेट प्राप्त करता नजर आता है। शुरुआती क्षणों में सब कुछ बिल्कुल सामान्य दिखता है—राष्ट्रपति छात्र को मेडल पहनाती हैं, कैमरे क्लिक करते हैं और मंच पर शांति बनी रहती है। लेकिन अचानक ऐसा पल आता है, जिसने पूरे माहौल को बदल दिया। जैसे ही मेडल पहनाने की प्रक्रिया पूरी होती है, छात्र सम्मान के भाव में झुककर राष्ट्रपति के पैर छूने की कोशिश करता है। यह दृश्य अप्रत्याशित था, क्योंकि राष्ट्रपति से सम्मान लेते समय ऐसा करना प्रोटोकॉल के खिलाफ माना जाता है। इसी पल ने इस पूरे वीडियो को वायरल बना दिया।
पैर छूते ही हरकत में आया गार्ड
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जैसे ही छात्र झुकता है, मंच के पीछे खड़ा सुरक्षा गार्ड तुरंत हरकत में आ जाता है। गार्ड तेजी से आगे बढ़कर छात्र को रोकने की कोशिश करता है, लेकिन तब तक छात्र राष्ट्रपति के पैर छू चुका होता है। यह सब कुछ कुछ ही सेकंड में होता है। छात्र के चेहरे से साफ झलकता है कि उसे इस नियम की जानकारी नहीं थी और उसका इरादा केवल सम्मान प्रकट करने का था। गार्ड की प्रतिक्रिया हालांकि बेहद त्वरित थी, क्योंकि राष्ट्रपति की सुरक्षा और मंच की मर्यादा बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी होती है। इसके बाद छात्र सामान्य तरीके से राष्ट्रपति से मेडल और सर्टिफिकेट प्राप्त करता है और मंच से चला जाता है। राष्ट्रपति की ओर से भी इस दौरान कोई असहज प्रतिक्रिया नहीं दिखती, लेकिन मंच पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था ने यह साफ कर दिया कि ऐसे कार्यक्रमों में नियमों का पालन कितना जरूरी होता है।
View this post on Instagram
क्यों नहीं छूए जाते राष्ट्रपति के पैर?
इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बड़ा सवाल उठने लगा—आखिर राष्ट्रपति के पैर छूने पर रोक क्यों होती है? दरअसल, राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है और उनके साथ होने वाले सभी सार्वजनिक कार्यक्रम तय प्रोटोकॉल के तहत संचालित किए जाते हैं। ऐसे मंचों पर किसी भी तरह का शारीरिक संपर्क, झुकना या पैर छूना सुरक्षा और गरिमा दोनों के लिहाज से उचित नहीं माना जाता। इसका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि मंच पर एक समान व्यवहार और अनुशासन बनाए रखना होता है। कई बार छात्रों या आम नागरिकों को इन नियमों की पूरी जानकारी नहीं होती और वे पारंपरिक सम्मान के तौर पर ऐसा कदम उठा लेते हैं। यही वजह है कि इस मामले में भी छात्र की मंशा पर सवाल नहीं उठाए जा रहे, बल्कि इसे जानकारी के अभाव से जुड़ा मामला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से पहले प्रतिभागियों को प्रोटोकॉल की जानकारी देना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
सोशल मीडिया पर बहस और लोगों की प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोग छात्र की सादगी और सम्मान की भावना की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि मंच के नियमों का पालन करना हर किसी की जिम्मेदारी है। कई यूजर्स ने सुरक्षा गार्ड की त्वरित कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि कुछ ने इसे जरूरत से ज्यादा सख्ती बताया। वहीं, कई लोगों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में बड़ों के पैर छूना सम्मान का प्रतीक है और छात्र ने वही भावना दिखाई। हालांकि प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से देखा जाए तो राष्ट्रपति जैसे पद पर आसीन व्यक्ति के साथ व्यवहार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संस्थागत होता है। यही वजह है कि यह वीडियो केवल एक भावनात्मक पल नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल और परंपरा के टकराव का उदाहरण बन गया है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि सम्मान जताने के तरीके समय, स्थान और मंच के अनुसार बदल जाते हैं, और राष्ट्रीय मंचों पर नियमों की जानकारी होना उतना ही जरूरी है जितना सम्मान की भावना।
