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दिल्ली की सड़कों पर तनाव की रात: मस्जिद के पास बुलडोजर पहुंचते ही पुलिस पर होने लगा पथराव, सामने आया वीडियो

दिल्ली में मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा, पुलिस पर पथराव, बॉडी कैम और CCTV से पहचान, 10 हिरासत में। जानिए रामलीला मैदान से जुड़े पूरे कानूनी विवाद की इनसाइड स्टोरी।

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दिल्ली में मस्जिद और दरगाह के पास हुए बवाल के बाद अब पुलिस की कार्रवाई नए मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने के दौरान कई जवानों ने बॉडी कैम पहन रखे थे, जबकि आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी सुरक्षित कर ली गई है। इन फुटेज के जरिए उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन्होंने सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की। शुरुआती जांच में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। अधिकारी साफ तौर पर कह रहे हैं कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

एक शिकायत से शुरू हुआ मामला

इस पूरे विवाद की जड़ में Save India Foundation नामक एक NGO की शिकायत है, जिसने दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से जुड़ी जमीन पर अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाया। शिकायत के अनुसार सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण कर उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पर 16 अक्टूबर 2025 को L&DO, DDA और MCD ने संयुक्त सर्वे किया। सर्वे रिपोर्ट में सामने आया कि 2512 वर्ग फुट PWD की जमीन और फुटपाथ पर अतिक्रमण किया गया था। इसके अलावा 36,428 वर्ग फुट रामलीला मैदान की जमीन, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए थी, वहां बारात घर, पार्किंग और एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित किया जा रहा था। प्रशासन ने इसे सार्वजनिक भूमि का गंभीर दुरुपयोग माना और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

हाई कोर्ट से MCD तक, वक्फ बोर्ड बनाम प्रशासन

मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां 12 नवंबर 2025 को अदालत ने MCD को तीन महीने के भीतर अवैध अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद MCD में कई दौर की सुनवाई हुई। पहली सुनवाई में दिल्ली वक्फ बोर्ड और मस्जिद प्रबंधन समिति ने जमीन को वक्फ संपत्ति बताया, जबकि L&DO ने स्पष्ट कहा कि विवादित जमीन कभी वक्फ बोर्ड को नहीं दी गई। दूसरी सुनवाई में वक्फ बोर्ड ने 1940 के रिकॉर्ड के आधार पर 0.195 एकड़ जमीन पर अपना दावा रखा। MCD की जांच में यह साफ हुआ कि 0.195 एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं है। 1959 में L&DO द्वारा 30 एकड़ जमीन रामलीला मैदान के रूप में MCD को दी गई थी, और उसके बाद उस जमीन पर किसी भी तरह का व्यावसायिक निर्माण नियमों के खिलाफ माना गया।

6 जनवरी की रात को हुआ बवाल

6 जनवरी 2026 को हाई कोर्ट में दोबारा सुनवाई के बाद जब स्टेटस क्वो नहीं मिला, उसी रात MCD ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। जैसे ही बुलडोजर विवादित स्थान पर पहुंचे, आसपास के इलाकों से सैकड़ों लोग जमा हो गए। देखते ही देखते हालात बिगड़ गए और सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू हो गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। मस्जिद और दरगाह की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड कर दिया गया और संकरी गलियों तक को सील कर दिया गया। पूरे इलाके को कॉर्डन ऑफ करने के बाद ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। अब पुलिस बॉडी कैम और CCTV फुटेज के जरिए हर उस चेहरे की पहचान करने में जुटी है, जिसने उस रात कानून को हाथ में लिया, और आने वाले दिनों में इस मामले में कार्रवाई और तेज होने के संकेत दिए जा रहे हैं।

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